वशिष्ठ गोंड की रिपोर्ट अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ समाज ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौप जिलाधिकारी* वाराणसी में गोंड अनुसूचित जनजाति के लोगों ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हुए बताया कि अधिकारियों द्वारा जाति प्रमाण-पत्रों का मनमाने ढंग से निरस्त किया जा रहा है और शासनादेशों व न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। आपको बता दें प्रशासन द्वारा कुटरचित तरीके से सरकार को बदनाम करते हुए खारिज किया जा रहा है आज हमारी जाति लगभग 5 लाख से ऊपर निवास कर रही है उसके बाद भी हमारे समाज के लोगों को भाजपा सरकार में कई पदों पर पदाधिकारी बनाने के बाद भी प्रशासन द्वारा आंख में धूल झोका जा रहा है उन्हीं के अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट भी लगाया जाता है पास भी किया जाता है उसके बाद शासनादेश को नजर अंदाज करते हुए खारिश कर देते हैं सरकार के कुछ ऐसे प्रशासनिक अधिकारी हैं जो शासन में रहकर शासन का ही नुकसान पहुंचाते है
वाराणसी में गोंड अनुसूचित जनजाति के लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए। शिकायत में कहा कि जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश चंद्र दुबे द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। आज गोंड समाज ज्ञापन के माध्यम से, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1994 और 1997 में दिए गए निर्णयों तथा बाद में खारिज की गई स्पेशल अपील के बावजूद गौड और “गोड़” को अलग-अलग जाति मानकर भेदभाव किया जा रहा है। जबकि समुदाय का कहना है कि यह केवल उच्चारणगत अंतर है और दोनों एक ही जाति हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शासन द्वारा वर्ष 1999 से 2021 तक जारी.की. गई स्पष्ट शासनादेशों के बावजूद भू-राजस्व अभिलेख, परिवार रजिस्टर और विद्यालय की टीसी में दर्ज जाति को अमान्य कर उन्हें “भड़भूजा” जाति में दर्ज किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 9 का हवाला देते हुए समुदाय ने कहा है कि अधिकारियों को स्वैच्छिक अधिकार नहीं है कि वे प्रमाण-पत्रों को मनमाने तरीके से निरस्त करें।
पीड़ितों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही बच्चों की जिंदगी से खेला जा रहा है बच्चों की पढ़ाई, छात्रवृत्ति और नौकरी में आरक्षण पर सीधा असर पड़ रहा है।
“हम लोग वर्षों से अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र पर लाभ लेते आए हैं, लेकिन अब अचानक हमारे प्रमाण-पत्र निरस्त किए जा रहे हैं। हम न्याय की मांग करते हैं।”
फिलहाल, गोंड अनुसूचित जनजाति के लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्यवाही करता है।
बाइट :– मनोज गोंड (अध्यक्ष, गोंड आदिवासी संघ)