बबुरी- में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन ने न केवल एक सामाजिक आयोजनका स्वरूप लिया, बल्कि यह हिन्दू समाज के आत्ममंथन और वैचारिक जागरण का सशक्त मंच बनकर सामने आया। विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अंबरिश जी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिन्दू समाज को संगठित, सशक्त और वैचारिक रूप से एकजुट होने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुगलसराय एवं चकिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी मौके पर मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और सामाजिक-राजनीतिक महत्व और अधिक बढ़ गया।अपने ओजस्वी और विचारोत्तेजक संबोधन में अंबरिश जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिन्दू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित है, और यह एकता तभी संभव है जब समाज जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर पहले स्वयं को हिन्दू माने। उन्होंने कहा—जाति हमारी सामाजिक पहचान हो सकती है, लेकिन हमारी पहली और सबसे बड़ी पहचान हिन्दू होना है। जब यह भाव समाज के भीतर मजबूत होगा, तभी हिन्दुत्व सशक्त होगा।”राष्ट्रीय प्रवक्ता ने हिन्दुत्व को किसी एक वर्ग या जाति तक सीमित न मानते हुए उसे सम्पूर्ण हिन्दू समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना और जीवन-दृष्टि बताया। उन्होंने कहा कि आज समाज आपसी भेदभाव, जातीय संकीर्णता और बाहरी प्रभावों के कारण बँटता जा रहा है, जिसका सीधा असर हमारी सांस्कृतिक जड़ों पर पड़ रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि हिन्दू समाज को चाहिए कि वह आपसी मतभेद भुलाकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत करे, ताकि भारतीय मूल्यों और परंपराओं की रक्षा हो सके।अंबरिश जी ने अपने संबोधन में यह भी चिंता जताई कि आज भारतीय समाज विदेशी फैशन, खान-पान और जीवनशैली से अत्यधिक प्रभावित होकर अपनी मूल परंपराओं से दूर होता जा रहा है, जबकि हमारी संस्कृति और जीवन-पद्धति गहरी वैज्ञानिक सोच, प्रकृति के संतुलन और अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित रही है। उन्होंने नई पीढ़ी से आग्रह किया कि वह भारतीय परंपराओं को केवल अतीत का विषय न माने, बल्कि उन्हें समझकर अपने दैनिक जीवन में अपनाए।सम्मेलन की अध्यक्षता कृष्णकांत पांडेय ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन दीप नारायण सिंह ने किया। आयोजन की जिम्मेदारी आयोजक हुकुम नारायण सिंह ने निभाई।कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के विधायक रमेश जायसवाल जी एवं चकिया के विधायक कैलाश आचार्य जी की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने भी हिन्दू समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखे।सम्मेलन में स्वागतकर्ता के रूप में विजय सिंह, लल्लू सिंह, संजय सिंह, टुनटुन सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, विमल सिंह, अशोक सिंह, चंद्रशेखर सिंह, हृदय नारायण सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में हिन्दू समाज के लोग उपस्थित रहे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज के भीतर सांस्कृतिक चेतना और एकता की भावना निरंतर मजबूत हो रही है।विराट हिन्दू सम्मेलन का मूल उद्देश्य जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर हिन्दुत्व की भावना को सुदृढ़ करना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और राष्ट्रहित में संगठित चेतना का निर्माण करना रहा—जो पूरे आयोजन के दौरान विचार, शब्द और सहभागिता के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।