रवि शंकर राय की रिपोर्ट
सोशल मीडिया के ज्यादातर भक्त लोग ही जांच में लग जाते हैं कि भाई यह कुत्ता था या कुतिया था
किसी ने ना तो उसका बचाव किया ना थेथरई किया
कुछ ही घंटे बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एग्जिबिशन हॉल से जाने का ऑर्डर दे दिया गया
लेकिन एक समय इस देश में स्वर्णिम राज था यानी कांग्रेस का शासन था
सब कुछ बड़ा शानदार चल रहा था कहीं कोई फ्रॉड नहीं होता था
मतलब इन कांग्रेसी लोगों ने क्या गजब का नॉरेटिव बना रखा है भाई
बंगाल का एक फ्रॉड व्यक्ति जो चोटी यानी पोनी रखता था बिल्कुल अलग तरह का हुलिया बना दिया था ताकि लोग उसे बहुत विद्वान समझे
जिसने बंगाल में फ्रॉड के कई घटनाओं को अंजाम दिया जो इंग्लिश अच्छा बोलता था
वह दिल्ली आ गया और एक फर्जी इंस्टिट्यूट खोल दिया नाम रखा इंडियन इंस्टीट्यूट आफ प्लैनिंग एंड मैनेजमेंट
जबकि कांग्रेस सरकार की ही बनाई गई गाइडलाइन के अनुसार ही कोई भी प्राइवेट संस्थान अपने नाम के आगे इंडियन शब्द नहीं लगा सकती
नाम से ऐसा लग रहा था जैसे यह कोई सरकारी संस्थान है आईआईएम के टक्कर का है या उसी तरह का संस्थान है जिसे भारत सरकार ने बनाया है
और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि खुद कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार 8 सालों तक यह समझती रही कि यह इंडियन इंस्टीट्यूट आफ प्लैनिंग एंड मैनेजमेंट उसकी यानी भारत सरकार की संस्था है
और इस फ्रॉड को बड़े-बड़े सरकारी मंच पर बुलाया जाता रहा जब भी सरकार बजट पेश करती थी हर चैनल पर इसका इंटरव्यू होता था शाहरुख खान अमिताभ बच्चन जैसे लोग इसके साथ मंच शेयर करते थे
कांग्रेस के दौर में जितने भी राष्ट्रपति रहे सब इसको सम्मान देते थे और तब इसे यही कहा जाता था कि यह भारत सरकार की एक प्रतिष्ठित संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट आफ प्लैनिंग का डायरेक्टर है
मतलब मनमोहन सिंह को और पूरे मंत्रिमंडल को यह पता ही नहीं चला कि ऐसी कोई संस्था तो उन्होंने बनाई ही नहीं है भाई
जबकि उसे वक्त यूजीसी ने भारत सरकार को तीन पत्र लिख दिया था कि मनमोहन जी इस इंस्टीट्यूट की कोई मानता नहीं है
और हां छात्रों से एडमिशन के लिए 10 लाख से लेकर के 25 लाख रुपए लिए जाते थे और डिग्री के नाम पर एक कागज का टुकड़ा दिया जाता था जिसकी कोई वैल्यू नहीं होती थी और यह फ्रॉड कहता था कि उसका बेल्जियम अमेरिका कनाडा जैसी यूनिवर्सिटी के साथ कोलैबोरेशन है
और इसने दिल्ली से ठगी की शुरूआत किया और एक के बाद एक देखते हुए और पूरे भारत के तमाम शहरों में 30 से ज्यादा ब्रांच खोल दिए
हर जगह प्राइम लोकेशन पर बड़ी सी बिल्डिंग किराए पर लेटा था उसे डेकोरेट करता था और बड़ा सा बोर्ड लगा देता था इंडियन इंस्टिट्यूट आफ प्लैनिंग एंड मैनेजमेंट
लोगों को लगता था रे वह भारत सरकार की एक संस्था उनके यहां खुल गई और उद्घाटन करने वाला केंद्र सरकार का कोई न कोई मंत्री होता था
यहां तक कि उस वक्त यह फर्जी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ सहित कई मंचों पर भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए जाती थी
फिर मनमोहन सरकार के जाते-जाते यानी सरकार जाने के 1 महीने पहले खुद मनमोहन सरकार ने देश को बताया कि भैया 9 साल 8 महीने हमने इसके साथ गलबहियाँ की लेकिन अब मैं देश को बताता हूं कि यह फ्रॉड है
यानी की भारत सरकार ने स्वीकार किया कि यह व्यक्ति फ्रॉड है यह संस्था फ्रॉड है
तो कांग्रेसियों , तुम एक चीनी कुत्ते या कुतिया पर छाती कूट रहे हो तुम्हारी पूरी सरकार चीन से चलती थी, एक पोनी वाला एक फ्रॉड तुम्हारी पूरी सरकार चलता था