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एटा: गुमानपुर में ‘खड़ंजा कांड’ ने पकड़ा तूल; भ्रष्टाचार छिपाने को ‘खाकी’ और ‘ठेकेदार’ का गठजोड़ सक्रिय;

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*एटा: गुमानपुर में ‘खड़ंजा कांड’ ने पकड़ा तूल; भ्रष्टाचार छिपाने को ‘खाकी’ और ‘ठेकेदार’ का गठजोड़ सक्रिय*

*भारतीय मीडिया फाउंडेशन का बड़ा ऐलान: RTI के जरिए खुलेगी ठेकेदार और थाना प्रभारी की कुंडली; यूनियन के संस्थापक एके बिंदुसार ने भरी हुंकार

*भ्रष्टाचार की ईंटों पर टिका विकास:*

जनपद एटा के ब्लॉक सटीक, ग्राम पंचायत मिर्जापुरराई के ग्राम गुमानपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की गई है। जिला पंचायत द्वारा कराए गए ईंटों के खड़ंजा निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए सबसे घटिया (पीला) ईंटों का प्रयोग किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खड़ंजा बिछाते समय ईंटों के बीच जानबूझकर भारी गैप रखा गया है, ताकि सामग्री की चोरी की जा सके।

*सच बोलने पर ‘खाकी’ का पहरा: थाना प्रभारी बने ‘जज’*

जब ग्रामीणों और स्थानीय पत्रकारों ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी, तो ठेकेदार ने अपनी साख बचाने के लिए सत्ता और पुलिस का सहारा लिया। बजाय जांच के, स्थानीय थाना प्रभारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले समाजसेवी, पत्रकारों और ग्रामीणों को ही ‘उठा लेने’ और फर्जी मुकदमा दर्ज करने की धमकी दे डाली। ऐसा प्रतीत होता है कि थाना प्रभारी निष्पक्ष जांच अधिकारी के बजाय स्वयं ‘जज’ की भूमिका में आ गए हैं और अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं।

*एके बिंदुसार का कड़ा रुख:* RTI के ब्रह्मास्त्र से होगा प्रहार

इस गंभीर प्रकरण पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए घोषणा की है कि संगठन अब इस मामले में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रशासन को घेरेगा:

*RTI के मुख्य बिंदु जिन पर मांगी जाएगी जानकारी:*

1- तकनीकी मानक (MB): खड़ंजा निर्माण के लिए स्वीकृत ‘मेजरमेंट बुक’ (MB) और एस्टीमेट की प्रमाणित कॉपी, ताकि ईंटों की गुणवत्ता और गैप की तुलना की जा सके।

2- मटेरियल टेस्टिंग: ठेकेदार द्वारा इस्तेमाल की गई ईंटों की लैब टेस्टिंग रिपोर्ट और उनकी खरीद के असली बिल।

3- ठेकेदार का प्रोफाइल: संबंधित ठेकेदार को पूर्व में दिए गए कार्यों का विवरण और उसकी फर्म की पात्रता की जांच।पुलिस की भूमिका: थाना प्रभारी द्वारा पत्रकारों और ग्रामीणों को दी गई धमकी और दर्ज कराई गई झूठी शिकायत पर पुलिस की ‘डेली डायरी’ (GD) की कॉपी।

आय से अधिक संपत्ति: आरोपी ठेकेदार और संलिप्त थाना प्रभारी के आय के स्रोतों और उनकी चल-अचल संपत्ति की जांच हेतु पत्राचार।

*बर्खास्तगी की मांग और संघर्ष का संकल्प*

यूनियन के संस्थापक एके बिंदुसार ने दो टूक शब्दों में कहा कि “लोकतंत्र में पत्रकार और जागरूक ग्रामीण देश की आंख और कान होते हैं। उन्हें डराने वाले थाना प्रभारी को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और भ्रष्टाचार की जांच नहीं कराई गई, तो संगठन प्रदेश व्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

> एटा का यह मामला अब केवल एक ‘घटिया खड़ंजे’ का नहीं रह गया है, बल्कि यह भ्रष्टाचार बनाम ईमानदारी की लड़ाई बन चुका है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन की इस सक्रियता ने भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है।

एके बिंदुसार ने सभी पत्रकार संगठनों को एकजूट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की हैं।

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