वरुन कुमार पांडे की रिपोर्ट
वाराणसी।थाना मिर्जामुराद क्षेत्र अंतर्गत कछवा रोड मंडी इन दिनों भीषण जाम का केंद्र बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि मात्र 100 मीटर की दूरी तय करने में आम लोगों को 25 से 30 मिनट तक का समय लग रहा है। सुबह से दोपहर तक सड़क पर रेंगते वाहन, फंसे पैदल यात्री और परेशान बुजुर्ग—यह नज़ारा अब यहां की दिनचर्या बन चुका है। जाम के कारण स्कूली बच्चे समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे, वहीं एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाएं भी फंसकर रह जा रही हैं, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो रही है।
*एक ओर सख्ती, दूसरी ओर खुली छूट*
थाना मिर्जामुराद पुलिस द्वारा हाईवे पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। होटल, ढाबा व अन्य प्रतिष्ठानों के सामने खड़ी गाड़ियों पर विशेष नजर रखी जा रही है, चालान काटे जा रहे हैं और दुर्घटनाओं से बचाव के नाम पर सख्ती दिखाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि एक्सीडेंट और अतिक्रमण रोकने के लिए यह कदम जरूरी हैं।
*मंडी क्षेत्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी*
लेकिन दूसरी तस्वीर कछवा रोड मंडी की है, जहां प्रशासन की कथित सख्ती बेअसर नजर आती है। मंडी के सर्विस रोड और मुख्य मार्ग पर ट्रक, मैजिक, पिकअप वाहन, ठेले और सब्जी विक्रेता सड़क पर ही कब्जा जमाए बैठे हैं। अवैध रूप से सड़क पर सब्जी बिक्री का सिलसिला सुबह 5 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक लगातार जारी रहता है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है।
*मिलीभगत या अनदेखी?*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाईवे पर कार्रवाई हो सकती है, तो मंडी क्षेत्र में यह अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा? क्या यह प्रशासन की अनदेखी है या फिर किसी की मिलीभगत से यह अव्यवस्था फल-फूल रही है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे जनता का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।
*जनता त्रस्त, जवाबदेही तय कौन करेगा?*
कछवा रोड मंडी में जाम अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और मरीज सभी इससे प्रभावित हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम जनता इस अव्यवस्था की कीमत चुकाती रहेगी और कब प्रशासन इस अतिक्रमण पर निर्णायक कार्रवाई करेगा?