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काशी को स्वयं में आध्यात्मिक परंपराओं का अंगूठा माना जाता है, जहाँ कण-कण में भगवान शिव का वास माना गया

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वाराणसी-काशी को स्वयं में आध्यात्मिक परंपराओं का अंगूठा माना जाता है, जहाँ कण-कण में भगवान शिव का वास माना गयाहै। इसी दिव्य परंपरा की कड़ी में महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट स्थित अघोरपीठ पर पवित्र पौष मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर चैत्र माह की पूर्णिमा तक अनवरत अनेक अनुष्ठान चलेंगे , इस अवसर पर एक भव्य और परंपरागत महान अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है।हरिश्चंद्र घाट पर यह अनुष्ठान गुरु अघोराचार्य श्री कपाली बाबा जी महाराज के दिव्य आशीर्वाद एवं श्री ब्रह्महिष्ठा भैरव स्वामी आश्रम ट्रस्ट, काशी के सानिध्य में, बाबा श्री काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है। यह आयोजन सोमवार, दिनांक 5 जनवरी 2026 से माँ गंगा के पावन तट पर प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं साधक सहभागिता कर भगवान की कृपा प्राप्त कर अपने आध्यात्मिक उत्थान का अनुभव कर रहे हैं।इस अनुष्ठान की विशेष व्यवस्था के अंतर्गत दिवस काल में शिव पंचाक्षरी मंत्र का जप एवं रुद्र गायत्री हवन संपन्न किया जा रहा है। वहीं रात्रि काल में अघोर परंपरा के अनुसार विशेष विधि-विधान से हवन किया जाएगा, जिसमें केवल परंपरा में दीक्षित साधकों द्वारा विशिष्ट आहुतियाँ अर्पित की जाएंगी।इस दिव्य अनुष्ठान में प्रमुख रूप से संचालन रामकृष्ण भैरव द्वारा किया जा रहा है,साथ में सार्थक बाबा,ओ.पी. राय, आशीष सिंह, अशोक सिंह, दिव्यांशु सिंह, शशांक श्रीवास्तव, भैरव देवदत्त शर्मा, राजकुमार बाबा एवं बांके सिंह सहित अनेक साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।काशी के महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट पर हो रहा यह अनुष्ठान आध्यात्मिक साधना, अघोर परंपरा एवं सनातन संस्कृति की अद्भुत झलक प्रस्तुत कर रहा है कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट वाराणसी

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