वाराणसी विजय कुमार की रिपोर्ट। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दुस्थान समाचार की ओर से भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 19 भाषा विद्वानों को सम्मानित किया गया तथा युगवार्ता और नवोत्थान पत्रिका का लोकार्पण हुआ।मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच एक दीवार खड़ी हो गई है। इसे तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल बनाना होगा। भारत को हजारों वर्ष पीछे जाकर बैठने की जरूरत नहीं, बल्कि अपने प्राचीन ज्ञान को वर्तमान विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि काशी में भौतिक विकास के लिए कॉरिडोर बने हैं, अब ज्ञान के क्षेत्र में भी ऐसा कॉरिडोर बनाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में बोलने वाले को विद्वान और अपनी भाषा में बोलने वाले को कमतर समझने की मानसिकता बदलनी होगी। सभी भारतीय भाषाएं ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की वाहक हैं।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज की निर्मिति नहीं, बल्कि शाश्वत ज्ञान के साक्षात्कार की परंपरा है। विविधता में एकत्व को पहचानना ज्ञान है और उस एक सत्य के विशेष रूप को समझना विज्ञान। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं क्षेत्रीय नहीं, अखिल भारतीय हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा का माध्यम है।
विशिष्ट अतिथि राज्य सूचना आयुक्त पदुम नारायण द्विवेदी ने कहा कि काशी का महत्व केवल भाषाओं तक सीमित नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा की भी इसकी जड़ें बेहद गहरी हैं। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी ने कहा कि भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाएं ज्ञान की छोटी-छोटी नदियों की तरह हैं। इनके समागम से भारतीय भाषाएं और अधिक समृद्ध और प्रभावशाली बनेंगी।
पूर्व मंत्री एवं वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि काशी केवल धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन की विशिष्ट भूमि है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की। समागम का शुभारंभ डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, मुकुल कानिटकर, केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डा.) वंगछुग दोर्जे नेगी, राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी और पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। अतिथियों का स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डॉ. राजेश तिवारी ने किया। इस मौके पर महामना पं. मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही। संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया।