वाराणसी। अर्थशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में प्रो. दूधनाथ चतुर्वेदी जी के जयंती के उपलक्ष्य में बुधवार को ‘विकसित भारत @ 2047: एन इकोनॉमिक पर्सपेक्टिव’ विषयक गोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य वक्ता प्रो. पारस नाथ मौर्य ने भी अपने व्याख्यान में प्रो. दूधनाथ चतुर्वेदी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए विकसित भारत@ 2047 की परिकल्पना को कैसे साकार किया जाए उस पर अपने विचार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी आवश्यकता में निवेश किया जाए। साथ उन्होंने बताया कि विकसित भारत के लिए हर स्तर पर आत्म चिंतन की आवश्यकता है।विभागाध्य प्रो. अंकिता गुप्ता ने विकसित भारत के लक्ष्यों पर चर्चा की। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने दूधनाथ चतुर्वेदी जी के जीवन चरित्र पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूधनाथ चतुर्वेदी जी महात्मा गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित थे। वह अर्थशास्त्र विभाग के संस्थापक के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के कुलपति भी थे। प्रो. तिवारी ने बताया कि विकसित भारत की रचना कृषि जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की बहुत आवश्यकता है, जिससे कि विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो सकेगी। कार्यक्रम में अन्नपूर्णा केसरी, ज्योति चौरसिया, शालिनी राय एवं रिफत फातमा ने अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ गंगाधर ने किया। इस अवसर पर प्रो. राजेश पाल, प्रो. हंसा जैन, प्रो.अमित कुमार सिंह, प्रो. शशिबाला, डॉ. पारिजात सौरभ आदि उपस्थित रहे।