वाराणसी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट। अर्थशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बुधवार को ‘दहेज के सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव’ विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. अंकिता गुप्ता ने कहा कि समाज में दहेज रूपी गम्भीर बीमारी ने बहुत सारी बेटियों को अपनी जीवन लीला समाप्त करते हुए देखा है। भारत में तेजी से बढ़ रही इस दहेज रूपी बीमारी को समाप्त करने के लिए हम सभी को एक साथ मिलकर कार्य करना होगा, जिससे भारत सरकार के दहेज मुक्त समाज के मिशन को प्राप्त किया जा सके।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. पारसनाथ मौर्य ने अपने वक्तव्य मैं उन्होंने दहेज मुक्ति के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी अपने विचार रखें। इसके बाद दहेज के सामाजिक आर्थिक दुष्प्रभाव पर एक पत्र प्रतियोगिता में सना आफरीन, जागृति सिंह, श्वेता सिंह, अश्विनी भारती, विश्वेश पटवर्धन, निखिल मौर्य, कीर्ति सिंह, अतुल कुमार पटेल, खुशी यादव, खुशी पांडे, व मनीष विश्वकर्मा आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गंगाधर ने किया। इस अवसर पर प्रो. राजेश पाल, प्रो. राजीव कुमार, प्रो. हंसा जैन आदि उपस्थित रहे।