प्रेम कुमार की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 106वें स्थापना दिवस के पूर्व दिवस पर विभिन्न विभागों में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए। अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारतरत्न शिवप्रसाद गुप्त एवं राष्ट्ररत्न डॉ. भगवानदास के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं समर्पण पर प्रकाश डाला। प्रो. सिंह ने शिवप्रसाद गुप्त की दानशीलता का उदाहरण देते हुये विद्या दान को सर्वश्रेष्ठ दान बताया। कार्यकम के द्वितीय सत्र बापू कक्ष में प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें पंजीकृत छात्र-छात्राओं ने श्रीमद भगवदगीता के श्लोकों का वाचन किया एवं प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना स्थान छात्र-छात्राओं द्वारा प्राप्त किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रुप में प्रो. नलिनी श्याम कानिल एवं डॉ. धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय रहे। स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़, संचालन डॉ. आकांक्षा सिंहम एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यकम संयोजिका डॉ. रीना चटर्जी ने किया। इस अवसर पर मानवीकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा, प्रो. बी.डी. पाण्डेय, प्रो. संजय, डॉ. राहुल गुप्ता, डॉ. अनूकूल चन्द राय, डॉ. नवरत्न सिंह, डॉ. नीरज कुमार सोनकर, प्रियोदीप हलघर आदि गणमान्य प्रोफेसरों की उपस्थिति रहे
इसी क्रम में इतिहास विभाग ने स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता वंदे मातरम, विकसित भारत- 2047, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और काशी विद्यापीठ विषय पर आधारित थी, जिसमें 58 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पिंकी गुप्ता, द्वितीय स्थान शिवानी विश्वकर्मा और तृतीय स्थान शाहिस्ता नाज और यशस्वी मिश्रा ने प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता संयोजक, इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी और राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. रविंद्र कुमार गौतम के नेतृत्व में प्रतियोगिता का आयोजित की गई। स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी एस.एंजेला मौजूद रही।
वहीं, विधि विभाग में ‘शिक्षा का विकास पर प्रभाव’ विषय पर व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. अनुराधा बापुली ने शिक्षा को मानव एव राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि गुणपूर्ण समावेशी एवं मूल्य-आधारित शिक्षा ही सामाजिक न्याय, समानता और सरात लोकतंत्र की नींव रखती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आहजन किया कि वे शिक्षा को केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज ने सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बनाए। स्वागत संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. रंजन कुमार, सचालन डॉ. मिराज हाशमी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिल्पी गुप्ता ने किया