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किसान पहचान पत्र वाले किसानों को ही मिलेगा योजनाओं का लाभ

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट

जमानियां। किसानों के पहचान पत्र (फार्मर आईडी) को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य किया गया है। सरकार ने बताया है कि 75 प्रतिशत कृषकों के पहचान पत्र तैयार हो चुके हैं। और शेष का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। 1 मई 2026 से सभी लाभार्थी परक योजनाओं में पहचान पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा। राजकीय गेहूं केंद्र के प्रभारी विपणन अधिकारी सत्य प्रकाश राय ने गुरुवार को बताया कि किसान पहचान पत्र वाले किसानों को ही मिलेगा योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए फॉर्मर आईडी (किसान पहचान-पत्र) अनिवार्य कर दिया है। विपणन अधिकारी सत्य प्रकाश राय ने बताया कि मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश की ओर से शासनानदेश जारी कर दिया गया है। शासन की ओर से इस संबंध में सूचना कृषि उत्पादन आयुक्त, उप्र शासन, उद्यान, सिंचाई, कृषि, खाद्य एवं रसद, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य, लघु सिंचाई सहित अन्य विभागों को प्रेषित कर दी गई है। पत्र भेजकर इस पर कार्रवाई कराने को कहा गया है। राय ने बताया कि शासन की ओर से कहा गया है। कि कृषि एवं राजस्व विभाग की ओर से संयुक्त रूप से भारत सरकार की ऐग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत कृषकों के किसान पहचान पत्र (फॉर्मर आईडी) बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत कृषकों के किसान पहचान पत्र तैयार किए जा चुके हैं। शेष कृषकों के किसान पहचान पत्र तैयार किए जाने का कार्य भी शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है। प्रदेश में छह से 15 अप्रैल तक कैम्प लगाकर किसान पहचान-पत्र बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। यह भी कहा गया है। कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से भविष्य में प्रदान की जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तों को उन्हीं कृषकों को प्रदान किया जाएगा। जिनके किसान पहचान-पत्र जारी किए गए होंगे। राज्य सरकार ने इसी नीति का अनुसरण करते हुए कृषि विभाग एवं सहयोगी विभागों की लाभार्थी परक योजनाओं का क्रियान्वयन किसान पहचान-पत्र के आधार पर किए जाने का निर्णय लिया है। किसान पहचान पर ही होगी गेहूं, धान की खरीद प्रथम चरण में उर्वरक, बीज, कीटनाशी एवं अन्य इनपुट के वितरण व लाभार्थियों के चयन में किसान पहचान पत्र को आधार बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किए जाने वाले कृषि उत्पाद (गेहूं /धान/दालें/ सरसों इत्यादि) के क्रय के लिए किसान पहचान पत्र भी अनिवार्य रहेगा। क्रय केंद्र पर कृषकों से खरीद से पूर्व उनके किसान पहचान पत्रों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया गया है। द्वितीय चरण में अन्य विभागों की ओर से भी किसान पहचान पत्र के आधार लाभार्थी परक योजनाओं में चयन/ लाभ वितरण की कार्यवाई की जाएगी। अनुदानित रासायनिक उर्वरकों का वितरण कृषि विभाग की ओर से किए गए आवंटन के आधार पर सहकारिता विभाग, प्राथमिक सहकारी समितियों (पीएसीएस) तथा निजी विक्रेताओं की ओर से स्कैन करने के बाद किया जाएगा। उर्वरकों का वितरण पीओएस मशीनों की मदद से इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टमम पोर्टल की सहायता से किया जाता है। मई, 2026 से यह वितरण किसान पहचान पत्र व फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही किया जाएगा। विपणन अधिकारी ने बताया कि पहली मई से कार्य करने लगेगा पोर्टलकृषि विभाग की समस्त लाभार्थी परक योजनाओं में किसान पहचान पत्र एवं फार्मर रजिस्ट्री की मदद से लाभार्थियों का चयन करने के लिए कृषि विभाग की ओर से अपने पोर्टल को पहली मई, 2026 तक तैयार कर लिया जाएगा। खाद्य एवं रसद विभाग तथा कृषि विभाग की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाने वाली समस्त खरीद में तत्काल प्रभाव से किसान पहचान पत्र/ फार्मर आईडी को अनिवार्य करते हुए मात्र उन्हीं कृषकों से खरीद की जाएगी, जिनके पास किसान पहचान पत्र होंगे। अन्य सहयोगी विभागों से भी लाभार्थी परक योजनाओं के लिए किसान पहचान पत्र का प्रयोग अनिवार्य करने के लिए कृषि विभाग से समन्वय कर 31 मई, 2026 से अनुपालन के लिए तैयारी पूर्ण कर ली जाएगी।

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