शिवपूजन कुमार की रिपोर्टवाराणसी।।केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर जल संरक्षण, कुओं और पोखरों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वाराणसी के लंका क्षेत्र में एक पुराने कुएं को बंद किए जाने की आशंका ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र के निवासी अभिषेक शंकर दुबे ने आरोप लगाया है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार द्वारा वर्षों से उपयोग किए जा रहे कुएं को बंद करने की बात कही जा रही है।
अभिषेक शंकर दुबे के अनुसार उनका परिवार पिछले लगभग छह दशकों से इसी कुएं के पानी का उपयोग करता आ रहा है। उनका कहना है कि यह कुआं केवल जल का स्रोत ही नहीं, बल्कि परिवार की दैनिक जरूरतों का प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के लगभग 20 सदस्य इसी कुएं के पानी पर निर्भर हैं और यदि इसे बंद कर दिया गया तो उनके सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा एक प्राइवेट कंपनी को काम करने के लिए दिया गया है और वह उन्हें मौखिक रूप से 24 घंटे के भीतर अपनी वैकल्पिक पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। उनका कहना है कि यह भी कहा गया कि यदि निर्धारित समय में व्यवस्था नहीं की गई तो कुएं में बालू डालकर उसे बंद कर दिया जाएगा। अभिषेक का दावा है कि इस संबंध में उन्हें किसी भी सरकारी विभाग की ओर से न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया है और न ही किसी प्रकार की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई है।
अभिषेक शंकर दुबे ने कहा कि जब सरकार स्वयं कुओं और पोखरों के संरक्षण की योजनाओं को बढ़ावा दे रही है और इसके लिए जनप्रतिनिधियों को बजट एवं संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, तब ऐसे में एक पुराने और उपयोग में आ रहे कुएं को बंद करने की बात समझ से परे है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में कुएं को बंद करना आवश्यक है, तो पहले प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक एवं स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा कुएं को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए बंद न किए जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर भी उसका पालन होना चाहिए।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि संबंधित पक्षों के बीच समय रहते संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह विवाद और गहरा सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और इस मामले में लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं।