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गौरा चलीं ससुराल काशीवासियों ने उड़ाया गुलाल

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दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

वाराणसी।काशीवासियों ने गौरी-शंकर और उनके लाल श्रीगणेश गुलाल लगाकर होली के उत्सव का विधिवत आरंभ किया। काशी में रंगभरी एकादशी का उत्सव सुबह से शाम तक टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर हुआ। बाबा को धारण कराने से पहले राजशाही पगड़ी, देवी पार्वती के महारानी मुकुट  और बाबा की प्राचीन पालकी की विशेष पूजा मंहत परिवार के प्रतिनिधि पं. वाचस्पति तिवारी ने की। पूरे दिन भक्तों द्वारा बाबा विश्वनाथ और माई महामाया को अबीर अर्पण करते रहे। चल प्रतिमाओं का दर्शन करने के लिए काफी संख्या में काशीवासी और विशिष्टजन पहुंचे। पालकी उठने का समय हो जाने के बाद भी लोग दर्शन के लिए कक्ष में प्रवेश करने के लिए भीड़ में जूझते रहे। डमरुओं की गर्जना बीच राजसी ठाट में बाबा माता गौरा के साथ पालकी पर सवार हुए। माता गौरा की गोद में गणेश भी बैठे थे। महंत आवास के बाहर मुख्य गली से मंदिर के मुख्यद्वार के बीच पालकी पर खास गुलाल की वर्षा होती रही। डमरूदल लगातार गर्जना करता रहा। शाम पांच बजकर नौ मिनट पर जैसे ही मंदिर से अर्चकों का दल महंत आवास की गली में पहुंचा समूचा वातावरण हरहर महादेव के घोष से गुंजायमान हो उठा। कपूर से आरती के बाद पं. वाचस्पति तिवारी ने दोनों हाथों में जलती मोबत्तियां लेकर बाबा की पालकी उठाने का संकेत किया। बाबा की पालकी महंत परिवार के सदस्यों द्वारा उठाते ही चारों तरफ से अबीर और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाई जाने लगीं। शंखों का नाद एक साथ होने लगा है। आगे-आगे डमरूदल और पीछे-पीछे बाबा की पालकी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ी। टेढ़ी नीम में नौ ग्रहेश्वर महादेव मंदिर से आगे बढ़ते ही विष्णु कसेरा के आवास से 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कराई गई। महंत आवास से निकल कर साक्षी विनायक तक पहुंचते-पहुंचते ही सबके सफेद वस्त्र लाल हो गए थे।बाबा और मां पार्वती की चल प्रतिमाएं टेढ़ीनीम स्थित महंत आसाव से निकाल कर साक्षीविनायक और ढुंढिराज विनायक होते हुए विश्वनाथ मंदिर तक गई।

शिवांजलि में भजनों का अर्पण

इससे पूर्व महंत आवास पर पारंपरिक शिवांजलि का सांकेतिक आयोजन किया गया। रुद्रनाद बैंड के टाइल सांग ‘पार्वती संग सदा शिव खेल रहे होली, भूत, प्रेत बैताल करते ठिठोली…’ से बैंड के लीर्ड ंसगर अमित त्रिवेदी ने किया। राग नट भैरव में निबद्ध उनकी रचना योगी ने माहौल को योगेश्वर शिव की अनुभूतियों से भर दिया। पूर्वांचल के चर्चित भजन गायक पुनीत जेटली पागल बाबा,प्रभु सिंह दाढ़ी, अदिति शर्मा, जौनपुर के सौरभ शुक्ला,सरोज वर्मा, संजय दुबे ने भजन गंगा बहाई।

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