Follow us on

चातुर्मास महाव्रत के अष्टम दिवस पर पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने श्रावण मास में शिवतत्त्व को समझने का दिया संदेश

Share this post:

वाराणसी कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट अनंत श्रीविभूषित काशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री काशीधर्म पीठ रामेश्वर मठ, अस्सी, वाराणसी में चल रहे चातुर्मास महाव्रत के अष्टम दिवस का सत्संग श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से धर्मोपदेश का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

अपने दिव्य प्रवचन में पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि श्रावण मास में शिवतत्त्व को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव केवल पूजन के देवता नहीं, बल्कि त्याग, करुणा, वैराग्य, समरसता और परम चेतना के प्रतीक हैं। शिवतत्त्व का वास्तविक ज्ञान मनुष्य को आत्मचिंतन, संयम, भक्ति और लोककल्याण के मार्ग पर अग्रसर करता है।

पूज्य गुरुदेव ने कहा कि श्रावण मास केवल व्रत एवं अभिषेक का पर्व नहीं, बल्कि अपने अंतःकरण को पवित्र करने और भगवान शिव के आदर्शों को जीवन में उतारने का श्रेष्ठ अवसर है। जब मनुष्य शिव के तत्व को समझकर जीवन में धारण करता है, तभी उसकी साधना सार्थक होती है और वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातःकाल पादुका पूजन, पूज्य गुरुदेव के दर्शन, सत्संग तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण का आयोजन निरंतर जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री काशीधर्म पीठ के व्यवस्थापक आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, आचार्य अनुज मिश्रा, प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी देव मणि शुक्ला मिर्जापुर , राकेश शेखडी व ब्रजेश पुरी जालंधर सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे।

लेखक के बारे में

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

मौसम अपडेट

राशिफल

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x