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जमानियां। माह ए रमजान में गरीबों में तकसीम किया (बांटा) जाता है। ताकि निर्धन लोग भी अपनी ईद अच्छी तरह से खुशी के साथ मना सकें

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया 

जमानियां। माह ए रमजान में गरीबों में तकसीम किया (बांटा) जाता है। ताकि निर्धन लोग भी अपनी ईद अच्छी तरह से खुशी के साथ मना सके। हजरत मोहम्मद स०अ०व० की हदीस है। कि तुम जमीन वालों पर रहम करो आसमान वाला तुम पर रहम फरमाएगा। (हदीस) सुनन अबी दाऊद नं. 4941) में है। शमसुन निशा, मोहम्मद गुलाम रसूल ने बताया कि इसी प्रकार पैगंबर साहब ने फरमाया है। कि जो व्यक्ति दूसरों पर रहम नहीं करता। उस पर अल्लाह भी रहम नहीं करता। उन्होंने फरमाया जो शख्स हमारे छोटों पर रहम नहीं करता और बड़ों का अदब नहीं करता है। वह हम में से नहीं है। (हदीस सुनन अबी दाऊदनं.4943). शमसुन निशा, मोहम्मद गुलाम रसूल ने कहा कि मानव कल्याण और इस्लाम का असली संदेश। हदीस से यह साबित होता है। कि समाज में जो निर्धन हैं। उनकी सहायता करना आवश्यक है। अर्थात यह धार्मिक उपदेश मानव कल्याण के लिए दिया गया है। उन्होंने ने बताया कि इस्लाम धर्म में दान देते समय या किसी की मदद करते समय किसी खास धर्म की अनिवार्यता नहीं है। इसलिए कुरआन में अल्लाह को अल्हम्दोलिल्लाहे रब्बिल आलमीन कहा गया है,अर्थात ईश्वर पूरी दुनिया का रब है। और पैगंबर साहब को रहमतुल लिल आलमीन अर्थात पूरे विश्व के लिए रहमत (कल्याणकारी) कहा गया है। शमसुन निशा, गुलाम रसूल ने बताया कि वर्तमान समय में इस्लाम का प्रासंगिक संदेश है। जब विश्व का मानव समाज तरह-तरह की कुंठा, धार्मिक उन्माद और वर्ग संघर्ष से त्रस्त है। तो ऐसे कठिन समय में इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है। कि वे इस्लाम के असल संदेश और उपदेश की रोशनी में अपना अच्छा जीवन (आचरण) प्रस्तुत करें। ताकि अन्य धर्मावलंबी इस्लाम की मजहबी एवं अखलाकी (नैतिक) विशेषताओं से रूबरू (अवगत) हो सकें।

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