सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी।केसरिया भारत संगठन ने यू.जी.सी. द्वारा पारित इक्विटी रेगुलेशन बिल–2026 को एकपक्षीय, भेदभावपूर्ण और समाज को विभाजित करने वाला करार देते हुए इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से प्रेषित किया गया।इस अवसर पर केसरिया भारत के प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह एवं प्रमुख संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय ने संयुक्त रूप से कहा कि यू.जी.सी. द्वारा लाया गया यह नया कानून उच्च शिक्षा संस्थानों के शैक्षणिक वातावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। यह बिल घोषित रूप से सामान्य वर्ग के छात्रों एवं शिक्षकों को संदेह के दायरे में खड़ा करता है, जो न्याय और समानता की मूल भावना के विपरीत है।नेताओं ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता–2023 में पहले से ही भेदभाव से संबंधित पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, ऐसे में अलग से इक्विटी समिति का गठन न केवल अनावश्यक है बल्कि इससे एक वर्ग विशेष को असुरक्षित भी किया जा रहा है। समता समिति में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व न होना तथा झूठी शिकायतों पर कोई दंडात्मक प्रावधान न होना, इस कानून को और अधिक पक्षपाती बनाता है।उन्होंने चेतावनी दी कि यह नियम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा, कैंपस में अविश्वास, टकराव और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देगा। शिक्षा संस्थान योग्यता, बुद्धिमत्ता और समान अवसर के केंद्र होते हैं, न कि भय और असमानता के केसरिया भारत ने केंद्र सरकार से मांग की कि यू.जी.सी. इक्विटी रेगुलेशन बिल–2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और संतुलित नियम बनाए जाएँ।इस अवसर पर प्रमुख रूप से कृष्णानन्द पाण्डेय, गौरीश सिंह, शिवम उपाध्याय, प्रवीण मिश्रा, हर्ष पांडेय, ऋषभ सिंह, आदर्श पाठक, हर्ष सिंह, अनिल मिश्रा, राजेश त्रिपाठी, आनंद मिश्रा एवं विशाल उपाध्याय उपस्थित रहे।