सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। देहरादून नदी पर करने के एक प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान भारतीय सेना के कैप्टन प्रशांत चौरसिया अपने साथी सैनिक की जान बचाने के प्रयास करते हुए। शहीद हो गए। यह एक वीरता पूर्ण बलिदान है। जिसने उनकी अदम्य साहस और कर्तव्य निष्ठा को प्रदर्शित करता है। बताया जाता है। की यह दुखद घटना देहरादून में ट्रेनिंग के दौरान हुई। कैप्टन प्रशांत चौरसिया एक सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान नदी पर कर रहे थे। इसी दौरान एक साथी सैनिक संकट में फंस गया। जिसे उनको बचाने के प्रयास में कैप्टन प्रशांत चौरसिया अपने प्राणों की आहुति दे दिया। बता दें कि प्रशांत चौरसिया ने अपने साथी को सुरक्षित बचाने की कोशिश में सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह उनकी इस वीरता और सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को भारतीय सेना में अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाएगा। बताया जाता है। की कस्बा बाजार दुर्गा चौक स्थित निवासी फौजी जवान शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया पुत्र पुरुषोत्तम चौरसिया उम्र 24 वर्ष ट्रेनिंग के दौरान रस्सी से पार करते समय देहरादून नदी में एक सैनिक साथी रस्सी टूटने से गिरकर गया। उसी सैनिक साथी को बचाने के प्रयास में अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस दर्दनाक घटना को सुनकर कस्बा बाजार के सभी व्यापारी अपनी अपनी दुकान बंद कर शोक व्यक्त किया। उधर पिता पुरुषोत्तम चौरसिया माता सुमन चौरसिया का रो रोकर बुराहाल रहा। आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। प्रशांत चौरसिया का जैसे ही शव कस्बा बाजार पहुंचा सैकड़ों युवक कैप्टन प्रशांत चौरसिया की पोस्टर के साथ तिरंगा झंडा हाथों में लिए कैप्टन प्रशांत चौरसिया अमर रहे जैसे गगन कुंभी नारे लगाया। साथी के गम में मोहल्ले वासी गम में डूब नजर आए। परिवार के सदस्यों के अनुसार बताया गया। की भारतीय सेना के कैप्टन प्रशांत चौरसिया का पार्थिव शरीर एयरपोर्ट पहुंचा है। वह देहरादून (उत्तराखंड) के 10 वीं भैरव बटालियन में तैनात थे। आर्मस एक्सरसाइज के दौरान हो गए शहीद को बाबतपुर एयरपोर्ट पर पुलिस ने दी सलामी इसके बाद 39 जीटीसी के जवान शव लेकर सड़क मार्ग से पैतृक निवास रवाना हुए। जिसके बाद गगन कुंभी नारों के साथ पक्का बलुआ घाट स्थित श्मशान घाट पर भारतीय सेना जवान कैप्टन प्रशांत चौरसिया के आर्थिक शरीर पर पुष्प अर्पित किया। और अंतिम सलामी दी। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने मुखाग्नि दी। वहीं भाजपा के पूर्व विधायिका सुनीता सिंह भी उपस्थित रही। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता, अधिशाही अधिकारी संतोष कुमार के अलावा अमन शांति कमेटी के सरपरस्त नेसार अहमद खान वारसी, व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष मुन्ना गुप्ता, पालिका सदस्य अंजनी गुप्ता उर्फ मन्नू, मटरू चौरसिया, अनिल कुमार गुप्ता उर्फ सोनू गुप्ता, गब्बर गुप्ता, राकेश कुमार गुप्ता उर्फ राका, असलम पान वाले, अनिल कुमार मद्धेशिया, माहिर कमाल अंसारी, नारायण दास चौरसिया, हाजी डॉ हयातुल्ला अंसारी, लालजी चौरसिया, साजिद कुरैशी, नेहाल खान, निगार खान, अमन खान गांधी, सारा मॉल के मैनेजर फैजान अहमद, अजहर अकिल, आदि सहित कस्बा बाजार के लोग घटना सुनने के बाद गमगीन रहे। कैप्टन प्रशांत चौरसिया की अंतिम संस्कार पक्का बलुआ घाट स्थित श्मशान घाट पर मृतक शहीद कैप्टन को जवानों द्वारा गार्ड और सलामी दी गई। जिसके बाद उनकी अंतिम संस्कार किया गया। उक्त मौके पर उपजिलाधिकारी सुश्री ज्योति चौरसिया,, तहसीलदार रामनारायण वर्मा, क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रामसजन राम, कानूनगोह नसीमुल्ला, लेखपाल आदि
मय पुलिस कर्मी शामिल रहे।
भारतीय सेना के शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया के आर्थिक शरीर पर पुरानी सट्टी बाजार स्थित सरदार खान की मस्जिद के पास मुस्लिम महिलाएं अपने अपने छतों से फूल बरसाए। क्या हिंदू क्या मुस्लिम सभी ने गम में शामिल होकर गम का इजहार किया। पार्थिक शरीर के साथ सैकड़ों मुस्लिम बंधु श्मशान घाट तक शामिल रहे। कंधे से कंधा मिलाकर दुःख में बराबर के हकदार बने।