सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानियां। प्लास्टिक तिरपाल बेचने वाले दुकानदारों के भुखमरी की कगार पर पहुंचने का मुख्य कारण व्यापार में भारी गिरावट और बदलती परिस्थितियां हैं। मंदी और संकट के मुख्य कारण बदलती स्थित को देखा जा रहा है। बारिश के समय और पैटर्न में बदलाव से तिरपाल की मौसमी मांग अचानक कम हो जाना दुकानदारों के सामने रोजी रोटी की गंभीर समस्या गहराई हुई है। कच्चे माल (प्लास्टिक दाने) की बढ़ती कीमतों के कारण मुनाफे का खत्म होना भी एक गम्भीर संकट से छोटे बड़े दुकानदारों के सामने चुनौती बन गई है। बारिश में (जहां तिरपाल की मांग सबसे ज्यादा होती है) लेकिन बढ़ती मंहगाई के चलते दुकानदार अजीज और परेशान होने लगे है। केवल तिरपाल पर निर्भर न रहकर ग्रीन नेट, तिरपाल बैग, और रेनकोट जैसी चीजें बेचना काफी परेशानी उठाने के बराबर हो चुकी है। दुकानदारों को ग्राहकों तक पहुंचने के लिए काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जमाल मंसूरी, बेलाल मंसूरी, जाहिद मंसूरी, शाहनवाज मंसूरी, कमाल मंसूरी सहित आदि दुकानदारों का कहना रहा कि बारिश के मौसम में भी तिरपाल की बिक्री नहीं के बराबर साबित होने लगी है। सुबह से लेकर शाम तक 500 सौ रुपया बेचना इस घड़ी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि परिवार का पालन पोषण करना जटिल हो चुकी है।