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बीते साल का अन्त और आरम्भ साहित्य जगत पर पड़ा भारी,तीन साहित्यकारों का निधन

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वाराणसी — बीते साल का अंत और इस वर्ष का आरंभ हिंदी साहित्य जगत पर भारी पड़ गया। पिछला वर्ष जाते-जाते तीन महत्वपूर्ण रचनाकारों को अपने साथ ले गया। बीते दिसंबर में कई उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ला, पत्रकार कथाकार अवधेश प्रीत और कवि नासिर सिकंदर नहीं रहे तो नए साल के आते ही सुप्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञान रंजन जीवन को अलविदा कह गए। प्रगतिशील लेखक संघ उत्तर प्रदेश ने अपने रचनाकारों को याद करने के लिए जूम पर एक ऑनलाइन बड़ी शोक सभा प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें ज्ञान रंजन सहित सभी रचनाकारों को बहुत मन से याद किया गया और श्रद्धांजलि भी दी गई। अध्यक्षता करते हुए कवि नरेश सक्सेना ने मोहन रखकर सभी साहित्यकारों का बेहद भावपूर्ण स्मरण किया।आरंभ में शोक प्रस्ताव प्रदेष के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर रघुवंश मणि ने रखा। इसके बाद दिवंगत कथाकार ज्ञान रंजन जी पर वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव, कवि कथाकार विनोद कुमार शुक्ला पर प्रो. नीरज खरे, कथाकार अवधेश प्रीत पर प्रोफेसर गोरखनाथ और कवि नसीर अहमद सिकंदर पर प्रो. आशीष त्रिपाठी ने विशेष वक्तव्य दिए। प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि ज्ञान रंजन जी का चुंबकीय व्यक्तित्व था। युवाओं को बहुत प्रोत्साहित करते थे। पहल पत्रिका के माध्यम से उन्होंने लेखकों की पीढ़ियां तैयार की। कथा समीक्षक प्रोफेसर नीरज खरे ने वरिष्ठ कवि व कथाकार विनोद कुमार शुक्ला पर बोलते हुए कहा कि विनोद जी कवि के रूप में अधिक जाने जाते थे। कथाकार के रूप में उनकी दूसरी छवि है। उनके उपन्यासों में प्रयोग चलता पाई जाती है। कथाकार अवधेश प्रीत पर बोलते भी आलोचक प्रोफेसर गोरखनाथ ने कहा कि 90 के बाद के कथाकारों की पीढ़ी के प्रमुख रचनाकार थे। पत्रकार के रूप में भी लंबे समय तक उन्होंने कार्य किया। अपने समय और समाज पर वे दायित्वपूर्ण नजरिया रखते थे। प्रसिद्ध कवि आलोचक प्रोफेसर आशीष त्रिपाठी ने कवि नसीर अहमद सिकंदर पर बोलते हुए कहा कि नासिर अहमद सिकंदर उन लोगों में से थे जिनके चेतन और अवचेतन में भी कोई अंतर नहीं था।इस कार्यक्रम में राकेश बेदा, प्रो. प्रेमचंद गांधी,प्रो.ज्योत्सना रघुवंशी,प्रो. अनीता गोपेश, डॉ. गया सिंह, प्रो. खान अहमद फारूक, प्रो. रीता चौधरी, प्रो. प्रभाकर सिंह,डा.फिदा हुसेन,डा.वन्दना चौबे, प्रो. आनंद शुक्ला,डा.नगीना जबीं,गया श्रीवास्तव ,चित्रा पवार, डॉ इंदु श्रीवास्तव,डा. संजय राय, डॉ. वसीमुद्दीन जमाली,डा.कलीमुल हक,आरडी आनंद, सुरेंद्र राही, आनंद मालवीय,डा. आनंद तिवारी, जयप्रकाश कुशवाहा, अजीत श्रीवास्तव, प्रकर्ष मालवीय, सुनील कुमार सहित संगठन के अनेक साथियों ने दिवंगत रचनाकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम का संचालन उप महासचिव संध्या निवेदिता ने तथा धन्यवाद सचिव डॉक्टर संजय श्रीवास्तव ने किया।

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