रिपोर्ट शिवपूजन कुमार की वाराणसी मातलदेई (वाराणसी)। मातलदेई गांव में एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के दौरान हुए विवाद और उसके बाद स्थानीय पुलिस उपनिरीक्षक के तबादले की चर्चा क्षेत्र में तेजी से हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस अधिकारी ने मानवता के नाते मरीज की मदद की, उसी को बाद में कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिससे लोगों में निराशा है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में रास्ते के विवाद के कारण एक व्यक्ति ने अपनी गाड़ी रास्ते में खड़ी कर दी थी, जिससे कई परिवारों का आवागमन बाधित हो गया। इसी दौरान एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे तत्काल अस्पताल ले जाना आवश्यक हो गया। परिजनों ने रास्ता खाली कराने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन बात नहीं बनी।
बताया जाता है कि मामले की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उपनिरीक्षक सतीश चन्द्र गुप्ता ने पहले समझाने का प्रयास किया और कहा कि मरीज की जान सबसे महत्वपूर्ण है। जब रास्ता नहीं खुला तो महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने विरोध किया और घटना का वीडियो भी बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि उपनिरीक्षक ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए कार्रवाई करनी पड़े तो वह अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की मदद से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया और उसका इलाज संभव हो सका। लेकिन बाद में की गई शिकायतों के आधार पर उपनिरीक्षक को चौकी से हटा दिए जाने की सूचना मिलने पर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी फैल गई।
स्थानीय लोगों का प्रश्न है कि यदि कोई पुलिसकर्मी मानवीय संवेदनाओं और अपने कर्तव्य के अनुरूप कार्य करता है, तो उसके पक्ष को भी निष्पक्ष रूप से सुना जाना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए।
मानवता, कानून और प्रशासन—तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही सच्चाई को सामने ला सकती है।