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भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण संपन्न

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संतोष कुमार सिंह वाराणसी

राजातालाब।आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में बिहार के किसानों के लिए आयोजित पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हो गया। प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ ‘कृषि-उद्यमी’ बनने के गुर सिखाए। समापन सत्र में प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र और उन्नत बीजों की किट प्रदान की गई।संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप फसल तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करना था। डॉ. सिद्धार्थ कुमार सिंह ने सभी प्रशिक्षुओं को सर्टिफिकेट वितरित किए। किसानों को ‘काशी निधि’ (लोबिया) के बीज और किचन गार्डन पैकेट दिए गए ताकि वे अपने क्षेत्रों में जाकर इन तकनीकों का प्रदर्शन कर सकें। वैज्ञानिकों ने आह्वान किया कि किसान अब केवल ‘उत्पादक’ नहीं बल्कि ‘विपणन विशेषज्ञ’ बनकर अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त करें।प्रशिक्षण के समन्वयक व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह के समन्वय में पांच दिनों तक चले इस सत्र में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पक्षों पर जोर दिया गया। डॉ. आर.के. दुबे ने बागवानी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली की जानकारी दी। डॉ. त्रिभुवन चौबे ने ग्रीष्मकालीन सब्जियों के प्रबंधन और उन्नत उत्पादन की तकनीकें बताईं। डॉ. सिद्धार्थ कुमार सिंह ने जैविक खेती और मृदा प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।कृषकों ने संस्थान के प्रयोगात्मक खेतों और प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। इस दौरान वे ब्रिमैटो (बैंगन+टमाटर), पोमैटो (आलू+टमाटर) और ग्राफ्टेड मिर्च की तकनीकों को देखकर अचंभित रह गए। उन्हें हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी की खेती), स्वचालित पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

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