सुकन्या सिंह की रिपोर्ट टू वाराणसी
वाराणसी।कहते हैं बालक भगवान का स्वरूप होता है और बालक के भीतर छिपी प्रतिभा ईश्वर की विशेष कृपा मानी जाती है। जब इतनी कम उम्र में कोई बालक असाधारण प्रतिभा का परिचय दे, तो उसे गॉड गिफ्ट कहना गलत नहीं होगा। ऐसी ही एक विलक्षण प्रतिभा इन दिनों काशी में देखने को मिल रही है।समस्तीपुर, बिहार से ताल्लुक रखने वाले होमी प्रसाद शर्मा बीते चार वर्षों से अपनी पत्नी मनु शर्मा के साथ वाराणसी में निवास कर रहे हैं। उनके पुत्र त्रिशांक शर्मा, जिनकी उम्र मात्र 5 वर्ष 8 दिन है, ने कम उम्र में ही अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सभी को चौंका दिया है।त्रिशांक अब तक पाँच गोल्ड मेडल जीत चुके हैं और इसी वर्ष मार्च माह में ब्लैक बेल्ट की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। यदि वे ब्लैक बेल्ट प्राप्त कर लेते हैं, तो वे सबसे कम उम्र में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाले देश के तीसरे सबसे युवा बालक बन जाएंगे।खेल के साथ-साथ त्रिशांक की रुचि संगीत और आध्यात्म में भी गहरी है। वे कई संगीत वाद्य यंत्र बजाने में दक्ष हैं। विशेष रूप से पियानो पर राष्ट्रगान का सजीव प्रस्तुतीकरण कर वे पूरे देश में सेकंड या थर्ड यंगेस्ट बॉय बनने की ओर अग्रसर हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन में भी वे नियमित रूप से भाग लेते हैं, जो उनकी आध्यात्मिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।त्रिशांक बेहद धैर्यशील, अनुशासित और समझदार बालक हैं। वे खेल और संगीत की विभिन्न विधाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने जीवन को पूरे आनंद के साथ जी रहे हैं।त्रिशांक के पिता होमी प्रसाद शर्मा ने बताया कि उनके पुत्र का सपना भविष्य में एक सफल क्रिकेटर बनने का है। वे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बड़े प्रशंसक हैं और उन्हीं की तरह देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।
काशी की पावन भूमि पर उभरती यह नन्ही प्रतिभा न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है।