सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर श्रद्धा और आस्था का विराट संगम देखने को मिला। पर्व के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर स्नान, ध्यान और दान–पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया। तड़के भोर से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर ओर “हर हर गंगे” के जयघोष गूंजते रहे।अस्सी घाट के तीर्थ पुरोहित बलराम मिश्रा ने बताया कि 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश हो गया था, जिसके साथ ही मकर संक्रांति का पुण्यकाल आरंभ हो गया। इसी कारण रात्रि से ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर तिल, गुड़, वस्त्र एवं अन्न का दान करना प्रारंभ कर दिया।उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को भी पूरे दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजन-अर्चन, जप-तप और दान कर मकर संक्रांति के महापुण्य का लाभ ले सकते है हैं। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, ब्राह्मण भोज तथा दान की परंपरा विधिवत रूप से संपन्न कराई जा रही है।स्नानार्थियों का कहना है कि मकर संक्रांति का पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। इस दिन गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु दूर-दराज से अस्सी घाट पहुंचे हैं।मकर संक्रांति के अवसर पर अस्सी घाट पर भक्ति, परंपरा और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली, जिसने काशी की धार्मिक गरिमा को और अधिक गौरवान्वित किया।अस्सी घाट पर हमारी मुलाकात महिला श्रद्धालु अन्नपूर्णा पांडे जो की खोजवा की रहने वाली है उन्होंने विधिवत गंगा स्नान करने के बाद पूजा पाठ कर रही थी अन्नपूर्णा पांडे जी ने बताया कि वह अपने भैया भाभी अपने पति बच्चों के साथ और रिश्तेदारों के साथ मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गंगा स्नान और अन्नदान करने के लिए आई हुई थी उन्होंने बताया कि गंगा स्नान के बाद मां गंगा की पूजा अर्चना करने के बाद अन्नदान करने से बहुत ही बड़ा पुण्य प्राप्त होता है।