विजय प्रजापति एडिटर की रिपोर्ट
नरमुंडों की माला, डमरू की गूंज और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठी काशी
वाराणसी। आस्था, अध्यात्म और रहस्य के संगम काशी में शनिवार को मणिकर्णिका घाट पर अनोखी मसाने की होली खेली गई। जलती चिताओं के बीच, रोते-बिलखते परिजनों और गुजरती शवयात्राओं के साथ साधु-संन्यासियों ने चिता की भस्म से होली खेलकर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। गले में नरमुंडों की माला, शरीर पर चिता की राख और हाथों में डमरू लिए नागा साधु पूरे उत्साह में नजर आए। घाट पर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ डमरू की गूंज वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंगती रही।
भस्म, रंग और आस्था का संगम
मसाने की होली का रंगोत्सव डमरू वादन से शुरू हुआ। साधु-संन्यासी सबसे पहले घाट पर पहुंचे और बाबा मसान नाथ का पूजन किया। भस्म, रंग, गुलाल और अबीर अर्पित करने के बाद चिता की राख से होली खेली गई। आमतौर पर जिस राख से लोग दूरी बनाते हैं, उसी भस्म को श्रद्धा और वैराग्य का प्रतीक मानकर साधुओं ने पूरे शरीर पर लगाया।
नागा साधु नरमुंडों की माला पहनकर घाट पर पहुंचे। कोई डमरू की थाप पर नृत्य कर रहा था तो कोई भस्म लपेटे ध्यानमग्न दिखाई दिया। हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अनूठे आयोजन को देखने पहुंचे। विदेशी पर्यटक भी रंग और चिता की राख में सराबोर होकर झूमते नजर आए। घाट की गलियों में जबरदस्त भीड़ रही।
शवयात्राओं के बीच चलता रहा उत्सव, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मसाने की होली के दौरान भी घाट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जारी रही। रंग और भस्म के बीच से शवयात्राएं गुजरती रहीं। इसी दौरान पांडेयपुर निवासी दुर्गा देवी का शव अर्थी से गिरने की घटना भी सामने आई। आरोप है कि पीछे से आए एक पुलिसकर्मी ने शव को रोकने की कोशिश की, जिससे शव नीचे गिर गया। परिजनों ने तत्काल शव को उठाकर पुनः अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।
सुरक्षा के मद्देनजर घाट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मणिकर्णिका घाट की ओर जाने वाले मार्ग को रस्सी लगाकर बंद कर दिया गया। इस दौरान कुछ लोगों की पुलिसकर्मियों से बहस भी हुई।
डमरू की लगातार गूंज, भस्म में लिपटे कलाकारों का वादन और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच काशी का यह अनूठा उत्सव आध्यात्मिक उन्माद और जीवन-मृत्यु के दर्शन का सजीव प्रतीक बन गया।