वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, शिक्षाशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति: उन्मुखीकरण एवं जागरूकता’ कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को उच्च शिक्षा में अकादमिक नेतृत्व एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर व्याख्यान हुआ। प्रथम सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के प्रो. दिनेश चहल ने उच्च शिक्षा में अकादमिक नेतृत्व विषय पर अपना व्याख्यान दिया। प्रो. दिनेश ने कहा कि नेतृत्व संगठन के सदस्यों को प्रभावित करने की प्रक्रिया है, जिसमें निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संगठन का नायक प्रयास करता है। इसी प्रकार शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु अकादमिक नेता समूह के सदस्यों को निर्देशित, नियमित एवं प्रेरित करता है। उच्च शिक्षा का लक्ष्य उच्च स्तर का चिंतन, अनुसंधान एवं विस्तार को सुनिश्चित करना होता है। इस प्रकार उच्च शिक्षण संस्थाओं में चिंतन एवं अनुसंधान हेतु उपयुक्त एवं अनुकूल शैक्षिक परिवेश को विकसित करना संस्थान के प्रमुख का कार्य होता है। द्वितीय सत्र में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रो. अवधेश कुमार ने भारतीय ज्ञान प्रणाली पर प्रकाश डाला। प्रो. अवधेश ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा को भारतीय विरासत एवं मूल्यों पर आधारित प्रणाली के विकास की आवश्यकता पर जोर देती है। भारत सदियों से अपने ज्ञान विज्ञान से विश्व को आलोकित करता रहा है, जिसके कारण इसे विश्व गुरु की उपाधि प्राप्त है। भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली श्रवण, मनन एवं निद्धयासन पर बल देती है जिसे गुरुकुल कहा जाता था, जहां पर प्रकृति की गोंद जीवन की वास्तविक परिस्थितियों एवं आवश्यक कौशलों का ज्ञान प्रदान किया जाता था। वेद, पुराण, उपनिषद और वेदांत भारतीय ज्ञान प्रणाली के मुख्य स्रोत हैं, जिसमें अनेक प्रकार की विद्याओं की जानकारी मिलती है। स्वागत करते हुए केंद्र निदेशक प्रो. सुरेंद्र राम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है। आज पूरा भारत अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ रहा है तथा विश्व में एक शक्तिशाली राष्ट के रूप में विकसित हुआ है जिसमें हमारी शिक्षा व्यवस्था का अहम योगदान है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रमाकांत सिंह, तकनीकी सहयोग विनय सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लालधारी यादव ने किया।