रिपोर्टर :-कुलदीप बरनवाल
वाराणसी। काशी में पिछले 24 घंटे में हुई 123.9 मिमी रिकॉर्ड बारिश ने नगर निगम, जलकल और स्मार्ट सिटी के तमाम दावों की पोल खोल दी है। कुछ घंटों की बरसात में ही पूरा शहर तालाब बन गया। सबसे बुरी स्थिति काशी के दिल कहे जाने वाले बीएचयू और गोदौलिया की रही, जहां घुटनों तक पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है। वहीं बारिश जनित हादसों, करंट लगने और दीवार गिरने से 5 लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: कहां-कहां मची तबाही
. BHU ट्रॉमा सेंटर और सर सुंदरलाल अस्पताल – सबसे शर्मनाक तस्वीर
BHU के मुख्य गेट से लेकर सर सुंदरलाल अस्पताल के ओपीडी और इमरजेंसी तक घुटने भर पानी भर गया। मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर पानी के बीच से धकेल कर ले जाना पड़ा। मुख्य द्वार पर जलभराव से दर्जनों एम्बुलेंस और गाड़ियां बंद हो गईं। तीमारदारों ने बताया कि अस्पताल के अंदर तक सीवर का पानी घुस गया है।
गोदौलिया, नई सड़क और दशाश्वमेध – व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान
शहर के सबसे व्यस्त कारोबारी इलाके गोदौलिया में 2 से ढाई फीट पानी भर गया। 400 से ज्यादा दुकानों में नाले का गंदा पानी घुस गया। कपड़ा, अगरबत्ती, प्रसाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान पानी में भीग कर खराब हो गया। व्यापारियों का आरोप है कि रोपवे प्रोजेक्ट के पिलर लगाने के दौरान भूमिगत शाही नाले को बंद कर दिया गया है, जिससे पानी की निकासी पूरी तरह ठप हो गई है।
सिगरा, कैंट, मकबूल आलम रोड और चितईपुर – सड़कें बनीं नदी
सिगरा, कैंट, सुसुवाही, भेलूपुर और मकबूल आलम रोड पर कमर तक पानी भरने से यातायात ठप हो गया। कई बाइक और कारें बीच सड़क में बंद हो गईं। मकबूल आलम रोड पर ओवरफ्लो मैनहोल से बड़ा हादसा होते-होते बचा। खुले मैनहोल और पानी में छिपे गड्ढे लोगों के लिए जानलेवा बने हुए हैं।
साकेत नगर, गांधी नगर, भगवानपुर – छात्रों की किताबें और राशन बर्बाद
कोचिंग हब माने जाने वाले साकेत नगर, गांधी नगर और भगवानपुर में हॉस्टल और लॉज के ग्राउंड फ्लोर में पानी घुस गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि उनका राशन, किताबें और कपड़े सब पानी में खराब हो गए।
घाटों पर दोहरी मार – छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार
एक तरफ बारिश और दूसरी तरफ गंगा का बढ़ता जलस्तर। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पूरी तरह डूब चुके हैं। शवों का दाह संस्कार घाट की ऊपरी सीढ़ियों और पास के घरों की छतों पर किया जा रहा है। सुरक्षा को देखते हुए गंगा में नाव संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि राहत की बात है कि गंगा का पानी अब 2 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रहा है।
हर साल वही कहानी, वही दावे
स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि मानसून से पहले हर साल नगर निगम नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों का बजट पास करता है, लेकिन 30 मिनट की बारिश में ही सारा सिस्टम फेल हो जाता है। स्मार्ट सिटी के नाम पर हुए काम जमीनी हकीकत में कहीं नहीं दिखते।
“नक्शा देखे बिना निर्माण, नालों पर अतिक्रमण और बिना प्लानिंग के रोपवे के काम ने काशी को डुबो दिया है।” – स्थानीय व्यापारी मंडल
फिलहाल नगर निगम की टीमें पंप लगाकर पानी निकालने में जुटी हैं, लेकिन अधिकांश इलाकों में अभी भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।