वाराणसी –उदय प्रताप इंटर कॉलेज भोजूबीर में गुरुवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर वाराणसी द्वारा इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत विद्यालय स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उदय प्रताप इण्टर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर रमेश प्रताप सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मेंकृषि वैज्ञानिक डा. नवीन कुमार सिंह,डा.अमितेश कुमार सिंह,डा.श्रीप्रकाश सिंह,डा.राहुल सिंह,प्रवक्ता डॉ विनय कुमार सिंह, नीरज कुमार सिंह, डॉ राघवेंद्र प्रताप सिंह, अनिल कुमार वर्मा उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ अमितेश कुमार सिंह द्वारा छात्रों को फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकी जानकारी के साथ-साथ फसल जलाने से होने वाले नुकसान जैसे की मृदा, पानी, तथा हवा द्वारा प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया की फसल अवशेषों का उद्योगों में विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जाता है। जैसे- बायो एथेनॉल और बायोगैस उद्योग में ईंधन उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में, कागज और गत्ते का उद्योग मे लुगदी बनाने हेतु, बायोमास ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए, निर्माण उद्योग में ईंट, प्लाईवुड और इको फ्रेंडली उत्पाद बनाने में इससे उद्योगों में ईंट,प्लाईउड और इको फ्रेण्डली उत्पाद बनाने में, इससे उद्योगों को किफायती, टिकाउ और पर्यावरण अनुकूल संसाधन मिलते हैं। केंद्र के बीज तकनीकी वैज्ञानिक डॉक्टर श्री प्रकाश सिंह ने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से 5-6 किलोग्राम नाइट्रोजन, 3 किलोग्राम फास्फोरस, 20 से 25 किलोग्राम पोटेशियम तथा 2 से 3 किलोग्राम सल्फर, 1470 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड दो से तीन किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड तथा 200 किलोग्राम राख ही रह जाता है। कृषि में मशीनों जैसे कि बेलर, , स्ट्रा चापर, स्ट्रा रीपर, रोटावेटर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर तथा हैप्पी सीडर इत्यादि मशीनों का प्रयोग करके पराली का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है।फसल अवशेषों का आच्छादन के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी। केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉक्टर राहुल सिंह ने बताया कि लाभदायक सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करके भी फसल अवशेषों को सड़ा गलाकर गुणवत्ता युक्त जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इसके लिए खेत में पराली को इकट्ठा करके उसके ऊपर पूसा वेस्ट डी कंपोजर का घोल बनाकर छिड़काव करने से 30 से 35 दिन के अंदर ही सड़ गलकर मिट्टी में मिल जाता है। जिससे मिट्टी की उर्बरा शक्ति बढ़ जाती है। इस कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी एवं डिबेट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया और विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विजेताओं में रवि यादव, युवराज, मनदीप, साकेत, प्रिंस, आदित्य और डिबेट प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार आर्यन सिंह, द्वितीय पुरस्कार आदित्य कुमार तथा तृतीय पुरस्कार आकाश सिंह और निहाल राज ने प्राप्त किया। इसमे लगभग 100 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग किया वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता