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रंगभरी एकादशी पर होगा गौरा का गौना, अघोर रूप में ससुराल पहुंचे महादेव

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रंगभरी एकादशी पर होगा गौरा का गौना, अघोर रूप में ससुराल पहुंचे महादे

*रूद्राक्ष–कांरूगाली धारण कर गणों संग गौरा सदनिका पहुंचे बाबा, ठंडई के भोग से हुआ स्वागत*

शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर सजेगा गौना संस्कार का दिव्य दृश्य

वाराणसी। काशी की जीवंत लोकपरंपरा में रंगभरी एकादशी का पर्व केवल तिथि नहीं, बल्कि शिव–गौरा के दांपत्य मिलन का अनुपम उत्सव है। इसी क्रम में गौना आयोजन की तृतीय निशा भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रही। गुरुवार सायंकाल महादेव रूद्राक्ष और कांरूगाली धारण कर अघोर स्वरूप में गणों संग गौरा सदनिका (ससुराल) पहुंचे तो टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास ‘हर-हर महादेव’ के घोष से गूंज उठा।

गौरा का गौना मंगलवार शुक्रवार को रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर सम्पन्न होगा। उसी दिन वैदिक मंत्रों और लोकरीति के मध्य गौना संस्कार का मुख्य अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा।

अघोर भाव में सजे महादेव, कुशा मंडप पर विराजे

तृतीय निशा का मुख्य आकर्षण रहा महादेव का अघोर स्वरूप। रूद्राक्ष की मालाओं और कांरूगाली से अलंकृत बाबा की चल प्रतिमा जब गौरा सदनिका पहुंची तो श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर स्वागत किया।

कुशा से निर्मित पवित्र मंडप में वेद मंत्रों के बीच महादेव को विराजमान कराया गया। पंचमेवा और विजया मिश्रित ठंडई का भोग अर्पित हुआ। काशी की परंपरा में यह ठंडई केवल प्रसाद नहीं, बल्कि उत्सव और आनंद का प्रतीक मानी जाती है।

ससुराल में बाबा के इस आत्मीय आगमन ने लोक और शास्त्र की परंपराओं को एक सूत्र में बांध दिया।

51 मंदिरों के प्रतिनिधित्व में उतरी आरती

काशी के 51 प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधित्व में महंत लिंगिया शिव प्रसाद पाण्डेय ने महादेव और गणों की विधिवत आरती उतारी। उनके साथ महंत वाचस्पति तिवारी ने परंपरागत पूजन सम्पन्न कराया।

यह दृश्य काशी की सामूहिक आस्था का अद्भुत उदाहरण बना, जहां विभिन्न मंदिर परंपराएं एक साथ बाबा के ससुराल आगमन की साक्षी बनीं।

वेद मंत्रों और लोकगीतों से गूंजा टेढ़ीनीम

दोपहर से ही गौरा सदनिका पर पांच वैदिक ब्राह्मणों ने चार दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में पूजन कराया। वेद मंत्रों की ध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

सायंकाल काशी की महिलाओं ने महादेव–गौरा की प्रतिमा का पूजन कर अटल सुहाग का आशीर्वाद मांगा। ‘गोरी के सुंदर बनावा…’, ‘सुकुमारी गौरा कइसे कैलास चढ़िहें…’, ‘गौरा गोदी में लेके गणेश विदा होइहैं ससुरारी…’ जैसे मंगलगीतों ने आयोजन को लोकभावना से ओतप्रोत कर दिया।

हर थाल में दीप जले, हर कंठ में भक्ति का स्वर था। यह केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की आत्मा का उत्सव प्रतीत हुआ।

शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर होगा मुख्य गौना

आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि गौरा का मुख्य गौना संस्कार शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर सम्पन्न होगा। उसी दिन गौरा के प्रतीकात्मक विदाई और दांपत्य मिलन का वैदिक एवं लोकाचार सम्मिलित अनुष्ठान होगा।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के अनुरूप बाबा विश्वनाथ माता गौरा संग रंगभरी एकादशी पर भक्तों को दर्शन देंगे। इस अवसर पर पालकी अनुष्ठान और विशेष श्रृंगार का आयोजन भी किया जाएगा।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन गौना दर्शन से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

अघोर और सौम्य स्वरूप का अद्भुत संगम

गौना आयोजन की तृतीय निशा में महादेव का अघोर भाव और गौरा का सौम्य श्रृंगार एक साथ दृष्टिगोचर हुआ। एक ओर रूद्राक्ष और कांरूगाली से सुसज्जित रौद्र स्वरूप, तो दूसरी ओर मंगल श्रृंगार से अलंकृत गौरा — यह दृश्य शिव–शक्ति के सनातन संतुलन का प्रतीक बना।

काशी की लोकसंस्कृति में यह आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि पारिवारिक आत्मीयता का उत्सव है, जहां देवता भी परिवार के सदस्य की तरह ससुराल आते हैं और काशीवासी उनके आतिथ्य का सौभाग्य पाते हैं।

*शिव बारात समिति की प्रार्थना: काशीवासियों को मिले सुगम दर्शन*

शिव बारात समिति ने आयोजन के दौरान काशीवासियों की ओर से विशेष प्रार्थना की कि बाबा विश्वनाथ का नियमित और सुगम दर्शन सभी श्रद्धालुओं को सहज रूप से प्राप्त हो।

समिति पदाधिकारियों ने कहा कि काशी की आत्मा बाबा में बसती है। अतः मंदिर में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और दूर-दराज से आने वाले भक्तों को बिना कठिनाई दर्शन का अवसर मिल सके।

समिति ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से समुचित व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह करते हुए यह भी कामना की कि बाबा की कृपा से काशी में सुख–शांति और समृद्धि बनी रहे।

रंगभरी एकादशी की प्रतीक्षा में काशी का जनमानस उत्साहित है। शुक्रवार को जब गौरा का गौना सम्पन्न होगा, तब काशी एक बार फिर शिव–शक्ति के दिव्य मिलन की साक्षी बनेगी। पूरे नगर में एक ही स्वर गूंज रहा है —

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