सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। रमजान माह के तीसरे जुमे को मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भर गई। कुछ मस्जिदों की छतों पर और सड़कों पर भी नमाज अदा की गई। उलेमाओं ने रमजान माह की फजीलत बयान कर सवाब हासिल करने की ताकीद की। रमजान माह के तीसरे जुमे को सुबह से ही नमाज की तैयारी शुरू कर दी। नमाज के वक्त से पहले ही लोग मस्जिदों की ओर चल पड़े। शाही जामा मस्जिद में 12.30 बजे से ही नमाजियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। एक बजे से पहले ही शाही जामा मस्जिद भर गई। छत पर भी नमाज अदा की गई। कारी शमशुल खिजिरपुर ने नमाज अदा कराई। इस दौरान उन्होंने तकरीर में कहा कि रमजान माह का दूसरा असरा भी खत्म होने के करीब होने को है। इसके बाद जहन्नुम से खलासी का तीसरा असरा शुरू होगा। रमजान माह के आखिरी दस दिनों ने नबी-ए-करीम ने ऐतकाफ फरमाया था। जिसका सिलसिला आज भी कायम है। इबादत की नियत से अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए अल्लाह के घर में कयाम करने को ऐतकाफ कहते हैं। शमशुल ने कहा कि इसकी तीन किस्में हैं। एक तो लोग बोल देते हैं। कि मेरा यह काम हो जाए। तो ऐतकाफ करुंगा। काम होने पर ऐतकाफ वाजिब हो जाता है। रोजे रखना भी लाजिम हैं। दूसरा यह कि मस्जिद में थोड़ी देर के लिए भी नियत कर ली तो सवाब मिलेगा। ऐतकाफ सुन्नत है। मोहल्ले में किसी न किसी शख्स को ऐतकाफ करना चाहिए। ऐतकाफ करने के लिए सूरज डूबने से पहले मस्जिद में दाखिल हो जाना चाहिए। ऐसी मस्जिद हो, जहां पांच वक्त की नमाज जमात के साथ होती हो। शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि औरतें घर में किसी मकसूस जगह पर ऐतकाफ करना चाहिए। और खाना, पीना, आराम करना सब मस्जिद में ही होना चाहिए। ऐतकाफ में इबादत करना, और तौबा करना और तिलावत करना चाहिए। ऐतकाफ की हालत में शख्स गुनाहों से बचा रहता है। नूरी मस्जिद के इमाम असरफ करीम कादरी ने कहा कि रमजान के तीसरे जुमे (शुक्रवार) पर मस्जिदों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं। उन्होंने कहा कि सभी उलेमाओं ने रोजे की फजीलत व तीसरे अशरे (निजात के अशरे) के बारे में बताया और अमन-चैन की दुआएं मांगीं।