विजय कुमार प्रजापति एडिटर की रिपोर्ट
वाराणसी होली के पावन अवसर पर इस बार रंग से ज्यादा अफवाहें उड़ीं। इस फगुआ में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हिन्दू नेता रोशन पाण्डेय। सुबह घर से निकले तो पत्नी से वादा करके गए थे – “बस तिलक लगवाकर आ रहा हूं।”
लेकिन दो घंटे बाद जब लौटे तो पहचानना मुश्किल! रंग ऐसा कि खुद आईने ने भी पूछ लिया – “पहले आधार कार्ड दिखाइए!”
मोहल्ले के चौराहे पर हालत ये रही कि रोशन जी ने बचने के लिए छत पर शरण ली, पर ऊपर से भी रंग बरसा दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने “भाग रोशन भाग” का नारा लगाते हुए ऐसी दौड़ लगाई कि अगर ओलंपिक कमेटी देख लेती तो तुरंत चयन कर लेती।
इसी बीच खबर आई कि नेता जी को आखिरी बार **Ganga River घाट पर देखा गया, जहां वे एक विदेशी पर्यटक (जिसे मोहल्ले वालों ने तुरंत “रशियन मैडम” घोषित कर दिया) के साथ होली का रंग साझा करते नजर आए।
दरअसल हुआ यूं कि विदेशी मेहमान ने “हैप्पी होली” कहते हुए गुलाल लगाया, और नेता जी ने भी भारतीय संस्कृति के तहत जवाब में तिलक कर दिया। पर पीछे खड़े कुछ फगुआ स्पेशल रिपोर्टरों ने फोटो खींचकर ऐसा एंगल बनाया कि “रंग” सीधा “रंगरेलियां” बन गया!
अफवाह इतनी तेज फैली कि किसी ने मजाक-मजाक में पुलिस को भी सूचना दे दी। पुलिस पहुंची तो नेता जी समझा रहे थे –
“अरे भइया, ये तो सांस्कृतिक आदान-प्रदान है, चुनाव प्रचार नहीं!”
पुलिसवालों ने भी हंसते हुए कहा –
“नेता जी, होली में रंग खेलिए, रशियन नहीं”
थोड़ी पूछताछ, दो-चार सेल्फी और “बुरा ना मानो होली है” के बाद मामला साफ हुआ कि यह सब गलतफहमी और कैमरे का कमाल था।
शाम तक मोहल्ले में नई हेडलाइन चल रही थी –
“नेता जी का इंटरनेशनल फगुआ, अब वाराणसी से सीधे वर्ल्ड टूर!”
कुल मिलाकर इस बार फगुआ में रंग कम और खबरें ज्यादा उड़ीं। और नेता रोशन पाण्डेय ने साबित कर दिया कि होली हो या राजनीति — सुर्खियों में रहना कोई उनसे सीखे!