वशिष्ठ गोड की रिपोर्ट वाराणस
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, वाराणसी महानगर द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सावित्रीबाई फूले सभागार में एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को युवाओं तक पहुँचाने एवं राष्ट्र निर्माण में युवाशक्ति की भूमिका पर केंद्रित रहा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभाविप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री आदरणीय श्री घनश्याम शाही जी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री विश्वभूषण मिश्रा जी (मुख्य कार्यपालक अधिकारी, काशी विश्वनाथ मंदिर) एवं श्रीमती सुनीता पांडे जी (कुलसचिव, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अभाविप वाराणसी महानगर अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं महानगर मंत्री श्री शिवम तिवारी जी भी मंचासीन रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के माननीय कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी जी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि अभाविप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री आदरणीय श्री घनश्याम शाही जी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की युवा चेतना को जागृत करने का अवसर है। स्वामी विवेकानंद जी ने जिस आत्मविश्वासी, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ युवा की कल्पना की थी, आज उसी विचार को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति में राष्ट्र की दिशा और दशा बदलने की क्षमता है, बशर्ते उसे सही विचार, उद्देश्य और मार्गदर्शन मिले।उन्होंने आगे कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं को केवल अकादमिक सफलता तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उनमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, सेवा भाव और सांस्कृतिक चेतना का भाव जागृत करने का कार्य करती है। आज जब वैश्वीकरण और भौतिकतावाद के कारण युवाओं के सामने वैचारिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं के लिए मार्गदर्शक दीपस्तंभ हैं।श्री शाही जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को अपने जीवन का केंद्र बनाएं, समाज की समस्याओं के समाधान हेतु आगे आएँ और सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति यदि संगठित, जागरूक और प्रतिबद्ध हो जाए, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।