सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। नगर कस्बा बाजार के शाही मस्जिद (जामा मस्जिद) में बुधवार रात कुरआन तरावीह मुकम्मल हो गई। रमजान माह का चांद नजर आते ही मस्जिदों में इबादत का सिलसिला शुरू हो गया था। तरावीह के खत्म होने पर देश में अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। तरावीह की नमाज हाफिज तौहीद रजा ने अदा कराई। उनके नेतृत्व में पूरी कुरआन शरीफ (तीस पारे) की तिलावत मुकम्मल हुई। तराबीह खत्म होने के बाद नमाजियों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। हाफिज तौहीद रजा ने आलम-ए-इस्लाम की सलामती, देश में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की। इस अवसर पर शाही जामा मस्जिद के सेकेट्री मौलाना तनवीर रजा ने झूम झुक कर देश में अमन चैन की दुआ की और सभी नमाजियों के लिए मगफिरत के लिए दुआ मांगी। बताया जाता है। की कुरआन तरावीह मुकम्मल होने पर शाही जामा मस्जिद के इमाम तौहीद रजा को फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया। मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि 18 फरवरी 2026 को रमजान का चांद नजर आने के साथ ही शाही जामा मस्जिद जमानियां में तरावीह की शुरुआत हुई थी। और 15 दिनों में कुरआन मुकम्मल हुई। उन्होंने कहा कि कुरआन पूरा हो जाने के बाद भी रमजान के शेष दिनों में सूरह तरावीह जारी रहेगी। उन्होंने रमजान की फजीलत बयान करते हुए। कहा कि यह महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। तरावीह की नमाज का विशेष महत्व है। और इसमें शामिल होकर मुसलमान ज्यादा से ज्यादा सवाब हासिल करते हैं। इमाम साहब तौहीद रजा ने बताया कि मुकद्दस रमजान में शाही जामा मस्जिद तराबीह नमाज 15 दिन तक चला उसके बाद तराबीह खत्म होने पर मुस्लिम बंधुओं ने देश में अमनचैन और तरक्की की दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न मस्जिदों में तराबीह की नमाज पढ़ने के लिए लोगों में उत्साह दिखा। रजा ने यह भी बताया कि माह ए रमजान सबसे पवित्र माह माना गया है। एक माह के रोजे के बाद ईद उल फितर का त्योहार आता है। रोजे के दौरान जुमा का अलग ही महत्व है। इस दौरान नमाजियों ने देश ,दुनिया और परिवार की बेहतरी की दुआ मांगी। इस दौरान दानिश मंसूरी, ताबिश मंसूरी, इस्माइल राईन, एखलाक राईन, नदीम सिद्दीकी, महफूज आलम, हबीबुल्ला उर्फ भोला राईन, शमीम राईन, नौशाद राईन, बबलू राईन आदि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।