सुकन्या सिंह की रिपोर्ट वाराणसी
देश-विदेश से दर्शन करने पहुंचे 10 लाख रैदासी,5 हजार सेवादारों ने संभाला मोर्चाआज संत रविदास की जयंती है। उनकी जन्मस्थली सज-संवर कर तैयार हो चुकी है। सजावट के साथ ही देश-विदेश से आने वाले अनुयायियों के लिए भी मुकम्मल व्यवस्था की गई है। 10 हजार से अधिक सेवादार पूरी व्यवस्था को संभाले हुए हैं। भोर से ही दर्शन पूजन का दौर शुरू होगा।संत रविदास की जयंती के अवसर पर सीर गोवर्धनपुर रैदासियों का शहर बना हुआ है। आज यहां लाखों की संख्या में अनुयायी और श्रद्धालु मौजूद हैं। इसके साथ ही इस क्षेत्र में अलग-अलग राज्यों से आए हुए रैदासियों और भक्तों के लिए टेंट सिटी का निर्माण किया गया है। लगभग 125 की संख्या में बनी इस टेंट सिटी में श्रद्धालुओं का जत्था रुकेगा। इसके साथ ही लंगर की व्यवस्था है और मेले में खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई है। आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में लगी रहेगी। पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश अन्य राज्यों से संत रविदास के अनुयायियों का जत्था आया हुआ है। उनके साथ NRI भी आये है।
अमृतवाणी पाठ के बाद फहराई गई रविदासी पताका
संत निरंजन दास ने मंदिर के पास लगभग 150 फीट ऊंची रविदासी पताका ‘हरि’ निशान साहिब का है। वहां सुबह 10 बजे ध्वज बदला गया। वहीं, मंदिर प्रशासन द्वारा सीर गोवर्धन के ऐतिहासिक इमली के पेड़ के नीचे रविदास जी के चित्र को सजाकर रखा गया है।
5000 सेवादार मंदिर में दे रहे सेवा
हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड व अन्य राज्यों से लगभग 5000 की संख्या में पहुंचे हैं। सेवादार यहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं की सेवा करते रहे। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। महिलाएं कतार में खड़ी कीर्तन करती रहीं। लंगर सुबह से ही चल रहा है। लाखों की संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि यहां पर 6 से अधिक भट्ठियों पर रोटियां पकाई गई हैं। करीब 20 लाख से अधिक रोटियां भक्तों के लिए बनाई गई हैं। लगभग 15 क्विंटल से अधिक नमक की खपत की गई है।
अस्थायी पुलिस चौकी खुली, बम निरोधक दस्ता भी तैनात रहेगा
संत रविदास की जयंती के मद्देनजर सीरगोवर्धनपुर स्थित मेला क्षेत्र में रविवार को अस्थायी पुलिस चौकी खोल दी गई। साथ ही एक इंस्पेक्टर, दो पुरुष व दो महिला दरोगा, आठ सिपाही तैनात कर दिए गए। संपूर्ण मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 200 से ज्यादा सीसी कैमरे लगाए जा रहे है। इसके मद्देनजर मेला क्षेत्र में छह इंस्पेक्टर, 115 पुरुष दरोगा, 35 महिला दरोगा, 225 पुरुष सिपाही, 45 महिला सिपाही और दो कंपनी पीएसी के जवान तैनात किए जाएंगे। आग से सुरक्षा के उपाय के लिए दो फायर टेंडर लगाए जाएंगे। 11 फरवरी की शाम सभी को तैनात कर दिया जायेगा।
अब जानिए कैसे हुई मंदिर की स्थापना
कहा जाता है कि इसी स्थान पर 649 साल पहले उनका जन्म हुआ था। ट्रस्ट से जुड़े निरंजन दास चीमा ने बताया कि रैदासियों के गुरु डेरा संत सरवन दास जी महाराज ने इस मौजूदा मंदिर का निर्माण कराया था। 1965 के आषाढ़ मास में इसकी नींव रखी गई थी और 7 साल बाद यानी 1972 में यह संत रविदास का यह मंदिर बनकर तैयार हुआ।मंदिर निर्माण के बाद से ही संत रविदास के इस दर पर उनके जयंती के अवसर पर रैदासियों की भीड़ यहां लगने लगी. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल समेत विदेशों में रहने वाले एनआरआई भक्त भी हर साल यहां आते हैं। इन भक्तों ने संत रविदास को अरबों रुपए दान भी दिया है।
मंदिर में 130 किलो सोने की पालकी,कहा जाता है दूसरा गोल्डन टेंपल
वाराणसी के सीरगोवर्धन स्थित संत रविदास का मंदिर रैदासियों की आस्था का केंद्र है। यहां प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक हाजिरी लगा चुके हैं। मंदिर के शिखर का कलश और मंदिर में मौजूद संत रविदास की पालकी से लेकर छत्र तक सब कुछ सोने का है। श्रद्धालुओं के दान से संत के मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित कराया गया है। संत रविदास मंदिर में 130 किलो सोने की पालकी रखी हुई है।
इसे 2008 में यूरोप के भक्तों ने संगत कर पंजाब के जालंधर में बनवाया था। इसका अनावरण बसपा सुप्रीमो मायावती ने फरवरी 2008 में किया था। इस पालकी को साल में एक बार जयंती के दिन निकाला जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1965 में हुआ था। यहां पहला स्वर्ण कलश 1994 में संत गरीब दास ने संगत के सहयोग से चढ़ाया था। बाद में भक्तों ने इसे 32 स्वर्ण कलशों से सुशोभित किया।
इसके अलावा 2012 में 35 किलो का सोने का स्वर्ण दीपक बनवाया गया। इसमें अखंड ज्योति जल रही है। इस दीपक में एक बार में पांच किलोग्राम घी भरा जाता है। इतना ही नहीं एक भक्त ने संगत कर मंदिर में 35 किलो सोने का छत्र भी लगाया है। कुल मिलाकर इस पूरे मंदिर में 200 किलो से ज्यादा सोना मौजूद है। जो हर साल भक्तों के दान से बढ़ता ही जा रहा है।
रविदास मंदिर मार्ग पर वाहनों के प्रवेश पर रोकएडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कई प्रमुख मार्गों पर रोक लगाई गई है और वैकल्पिक रास्ते दिए गए हैं। भगवानपुर मोड़ से संत रविदास मंदिर की ओर जाने वाले सभी वाहन रोके जाएंगे। इन्हें नगवा और मालवीय गेट की ओर डायवर्ट किया जाएगा। रमना चौकी तिराहा से संत रविदास मंदिर तिराहे की ओर किसी भी प्रकार के वाहन नहीं जाएंगे। इन वाहनों को डाफी की ओर मोड़ा जाएगा।
मंदिर की ओर सभी वाहनों पर पूरी तरह रोक
संत रविदास मंदिर तिराहे से मंदिर की ओर सभी प्रकार के वाहनों पर पूरी तरह रोक रहेगी। यहां से वाहन रमना चौकी तिराहे और भगवानपुर की ओर भेजे जाएंगे। मारुति नगर तिराहे से भगवानपुर (संत सरवनदास यात्री निवास) की ओर वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। लौटूबीर अंडरपास चौराहा से कार्यक्रम से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य वाहन रविदास मंदिर की ओर नहीं जाएंगे। इन्हें नुवाव चौराहे की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
बसों और भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था
रविदास गेट से लंका और नगवा चौकी की ओर किसी भी वाहन को नहीं जाने दिया जाएगा। इन्हें मालवीय गेट की ओर भेजा जाएगा। अमेठी कोठी तिराहा से रविदास घाट की ओर जाने वाले वाहन रविदास गेट या नगवा चौकी की ओर डायवर्ट किए जाएंगे। नगवा चौकी से भगवानपुर मोड़ की ओर जाने वाले वाहन सामनेघाट की ओर भेजे जाएंगे। नरिया तिराहे से बीएचयू चौराहे की ओर जाने वाले वाहनों को करौंदी की ओर मोड़ा जाएगा, जो नुवाव अंडरपास और भिखारीपुर तिराहा होते हुए जाएंगे। एनएच-19 के पास पुराने रमना पुलिस चौकी के पास से कार्यक्रम से संबंधित बसों को छोड़कर सभी बसें अमरा अखरी और टेंगरा मोड़ की ओर डायवर्ट किया गया है।
इस तरह रही मंदिर की विकास यात्रा
• जून 1965 को संत रविदास मंदिर के नींव की पहली ईंट रखी गई थी। फरवरी, 1974 में संत रविदास की मूर्ति स्थापित हुई।
• 7 अप्रैल, 1994 को कांशीराम ने पहला स्वर्ण कलश मंदिर पर लगाया।
• साल 2008 में पंजाब से स्वर्ण पालकी काशी लाई गई। इसका लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया था।
• 30 जनवरी, 2010 को काशी से रविदासिया धर्म की स्थापना हुई और अमृतवाणी का ऐलान किया गया।
• 2012 में मंदिर का सबसे बड़ा शिखर स्वर्ण मंडित कराया गया।
• 2015 से मंदिर में चौबीसों घंटे लगातार अखंड स्वर्ण दीप जल रहा है।
• PM नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में मंदिर के सुंदरीकरण और विस्तारीकरण की आधारशिला रखी।
• CM योगी आदित्यनाथ ने साल 2023 में 24 करोड़ रुपए से संत रविदास म्यूजियम बनाने की घोषणा की।