संविधान दिवस: राष्ट्र की आत्मा, अधिकारों का आधार। काशी दीप विजन। लेखक:नवीन प्रकाश सिंह
हर वर्ष 26 नवंबर को पूरे देश में संविधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन महज़ एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की नींव, उसकी आत्मा और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले दस्तावेज़—भारत के संविधान—के अंगीकार का स्मरण है। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने इसे अपनाया और 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया। संविधान दिवस हमें केवल इतिहास की ओर नहीं ले जाता, बल्कि हमें अपने कर्तव्यों, जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक मूल्यों की भी याद दिलाता है।संविधान: एक विचार नहीं, एक संकल्प।भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत और सर्वस्वीकार्यता वाले संविधान में गिना जाता है। इसकी रचना सिर्फ़ विधिक दस्तावेज़ तैयार करने का कार्य नहीं थी, बल्कि यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना पर आधारित एक नए भारत का संकल्प था।डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों की अथक मेहनत से इस महान दस्तावेज़ को रूप दिया। इसमें भारत की विविधता, सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक मूल्यों और भविष्य की आकांक्षाओं को समाहित किया गया।नागरिकों के अधिकार: लोकतंत्र की सुरक्षा कवच।संविधान हमारा सुरक्षा कवच है, जो प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार प्रदान करता है—अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समानता का अधिकार धर्म की स्वतंत्रतासं वैधानिक उपचार का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण प्रक्रियाओं का संरक्षणये अधिकार केवल क़ानूनी शब्द नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वाभिमान की रक्षा करने वाले स्तंभ हैं।कर्तव्यों का स्मरण: अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ।संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन साथ ही राष्ट्रनिर्माण में हमारी भूमिका भी तय करता है।देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं के सम्मान व सामाजिक सद्भावना—ये सभी संवैधानिक कर्तव्य हमें एक बेहतर समाज गढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।संविधान दिवस की प्रासंगिकता आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है, लोकतांत्रिक मूल्यों पर चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में संविधान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि—लोकतंत्र की जड़ें जनता की भागीदारी में हैं।संविधान केवल न्यायालयों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की गारंटी है।हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह कानून का सम्मान करे और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखेसंविधान—जीवंत दस्तावेज़भारत का संविधान सिर्फ़ 395 अनुच्छेदों और अनुसूचियों का संग्रह नहीं, बल्कि यह एक जीवंत दस्तावेज़ है, जो समय के साथ स्वयं को समाज की आवश्यकताओं के अनुसार ढालता रहा है। संविधान दिवस हमें राष्ट्र के इस महान संकल्प को समझने और उसे जन-जन तक पहुँचाने का अवसर देता है।