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सरकारी और निजी भूमि के विवरण में यह अंतर किसके स्तर पर किया गया है। पत्रावली में रक्षित दस्तावेजों से यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जिसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा

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सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानिया 

जमानिया। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-24 (पुराना एन एच -97) पर गंगा नदी पर बन रहे रेल-सह-सड़क पुल के पहुँच मार्ग हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। मेदनीपुर मौजा में एनएचएआई की टीम द्वारा प्रस्तावित भूमि के चिन्हांकन में मिली भारी खामियों के बाद, सक्षम प्राधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) गाजीपुर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधितों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार रामनरायण वर्मा ने बताया कि सरकारी जमीन के रहते निजी भूमि पर नजर राजस्व टीम द्वारा की गई स्थलीय और अभिलेखीय जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कई गाटा संख्याओं में आवश्यकता से अधिक या अनावश्यक रूप से निजी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, आराजी संख्या 59/1, 90/1, 91/1 और 92/1 में लोक निर्माण विभाग की सरकारी जमीन पहले से ही उपलब्ध और अवशेष है। इसके बावजूद, एनएचएआई की टीम ने सरकारी जमीन का उपयोग करने के बजाय काश्तकारों की निजी भूमि (संक्रमणीय भूमिधरी) के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेज दिया, जिसकी तकनीकी रूप से कोई आवश्यकता नहीं पाई गई है। अभिलेखों में हेरफेर की आशंका अपर जिलाधिकारी कार्यालय ने संज्ञान लिया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3ए के तहत जो प्रस्ताव मूल रूप से कार्यालय को उपलब्ध कराया गया था और जो ताजा जांच आख्या प्राप्त हुई है, उनमें जमीन के विवरण को लेकर काफी भिन्नता है। प्रशासन ने सवाल उठाया है कि सरकारी और निजी भूमि के विवरण में यह अंतर किसके स्तर पर किया गया है? पत्रावली में रक्षित दस्तावेजों से यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, जिसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

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