रवि शंकर राय की रिपोर्ट वाराणसी
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, के आई.क्यू.ए.सी. एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘भारतीय दर्शन में पर्यावरण चेतना’ विषयक परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि सादगी ही प्रकृति की रक्षा का मूल मंत्र है। भारतीय दर्शन में प्रकृति को ‘उपभोग की वस्तु’ नहीं, बल्कि ‘सजीव एवं चेतन सत्ता’ के रूप में स्वीकार किया गया है, जो आज के पर्यावरणीय संकट के समाधान का आधार बन सकती है।मुख्य वक्ता डॉ. अनिल कुमार, अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पर्यावरण संरक्षण केंद्र, भुवनेश्वर (उड़ीसा) ने भारतीय दर्शन में प्रकृति-चेतना, पृथ्वी को माता मानने की अवधारणा तथा सतत विकास की दार्शनिक दृष्टि पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आधुनिक पर्यावरण संकट मूलतः चेतना का संकट है, जिसका समाधान भारतीय दार्शनिक दृष्टि में निहित है। विशिष्ट अतिथि अजय, पर्यावरण संयोजक, पूर्वी उत्तर प्रदेश ने क्षेत्रीय स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों एवं जनभागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।स्वागत करते हुए मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र ने भारतीय दर्शन की पर्यावरणीय दृष्टि तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच नैतिक संतुलन स्थापित करने की समग्र दृष्टि पर बल दिया। संचालन डॉ. अम्बरीष राय एवं धन्यवाद ज्ञापन आई.क्यू.ए.सी. निदेशक एवं दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. नंदिनी सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, प्रो. पीताम्बर दास, प्रो. आनंद शंकर चौधरी, प्रो. राकेश तिवारी, प्रो. अनीता, डॉ. कविता आर्या, डॉ. गणेश जायसवाल, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. प्रियंका, डॉ. कविता, शांभवी आदि उपस्थित रहे।