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सिद्धि और साधना के लिए की जाती है गुप्त नवरात्रि-

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चंदन तिवारी वाराणसी

हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक को गुप्त नवरात्रि पर्व के नाम से जाना जाता है। हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में से एक गुप्त नवरात्रि है। गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती है। पहली गुप्त नवरात्रि आषाढ़ में और दूसरी माघ मास में पड़ती है।

वस्तुतःइस वर्ष 19 जनवरी सोमवार से 28 जनवरी बुधवार तक हैं। गज (हाथी) पर सवार होकर आयेंगी माँ शक्ति स्वरूपा,

और गमन गज (हाथी) होगा।

उक्त बातें श्री सोमेश्वर नाथ सह आयुष्मान ज्योतिष परामर्श सेवा केन्द्र के संस्थापक साहित्याचार्य ज्योतिर्विद आचार्य चन्दन तिवारी ने बताया कि पौराणिक काल से ही लोगों की आस्था गुप्त नवरात्रि में है। गुप्त नवरात्रि में शक्ति की उपासना की जाती है ताकि जीवन तनाव मुक्त रहे।

माना जाता है कि अगर कोई समस्या है तो उससे निजात पाने के लिए खास मंत्रों के जाप से उससे मुक्ति पाया जा सकता है।

शुभ मुहूर्त:-

कलश स्थापन मुहूर्त :- 06:41 से 05:19 तक,

अभिजित मुहूर्त :- 11:25 से 12:35 तक,

 

देवी भागवत में आए प्रसंग के मुताबिक जिस तरह चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। उसी प्रकार माघी गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्रि की अवधि में साधक श्यामा (काली), तारिणी (तारा), षोडशी (त्रिपुर सुंदरी), देवी भुवनेश्वरी, देवी छिन्नमस्ता, देवी धूमवाती, देवी बागलमुखी, माता मतंगी और देवी लक्ष्मी (कमला) की आराधना करते हैं। चूंकि इस नवरात्रि में दस महाविद्या की उपासना गुप्त रूप से होती है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि का नाम दिया गया है।

 

शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।

गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥ ( देवीपुराण)

 

रविवार और सोमवार को भगवती हाथी पर आती हैं,

शनि और मंगल वार को घोड़े पर,

बृहस्पति और शुक्रवार को डोला पर,

बुधवार को नाव पर आती हैं।

 

गजेश जलदा देवी क्षत्रभंग तुरंगमे।

नौकायां कार्यसिद्धिस्यात् दोलायों मरणधु्रवम्॥

 

अर्थात् दुर्गा हाथी पर आने से अच्छी वर्षा होती है,

घोड़े पर आने से राजाओं में युद्ध होता है।

नाव पर आने से सब कार्यों में सिद्ध मिलती है और

यदि डोले पर आती है तो उस वर्ष में अनेक कारणों से बहुत लोगों की मृत्यु होती है।

 

गमन (जाने)विचार:-

 

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा,

शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।

बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा,

सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

 

भगवती रविवार और सोमवार को महिषा (भैंसा)की सवारी से जाती है जिससे देश में रोग और शोक की वृद्धि होती है।

शनि और मंगल को पैदल जाती हैं जिससे विकलता की वृद्धि होती है।

बुध और शुक्र दिन में भगवती हाथी पर जाती हैं। इससे वृष्टि वृद्धि होती है।

बृहस्पति वार को भगवती मनुष्य की सवारी से जाती हैं। जो सुख और सौख्य की वृद्धि करती है।

इस प्रकार भगवती का आना जाना शुभ और अशुभ फल सूचक हैं।

इस फल का प्रभाव यजमान पर ही नहीं, पूरे राष्ट्र पर पड़ता हैं

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