सिस्टम का ‘इंच-टेप’ कांड: मर्डर हो गया पर साहब लोग अभी भी इलाका नाप रहे हैं!
उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में जो हुआ, वो डबल मर्डर कम और ‘प्रशासनिक पिकनिक’ ज्यादा लग रहा है। यहाँ कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी ऐसे ‘पासिंग द पास’ खेल रहे थे जैसे मेडल जीतने की तैयारी हो। आइए, इस महा-लापरवाही के मुख्य किरदारों और उनकी ‘महानता’ पर एक नजर डालते हैं।
क्षेत्राधिकार का ‘गूगल मैप’ फेल!
हमारे दो सर्किल ऑफिसर (CO) साहबान के पास शायद दुनिया का सबसे खराब जीपीएस (GPS) था। डीएम साहब ने कहा “जांच करो!” तो दातागंज सीओ ने उझानी की तरफ उंगली दिखा दी, और उझानी वाले साहब ने वापस गेंद दातागंज के पाले में डाल दी।
जनता: साहब, मर्डर होने वाला है!
सीओ साहब: रुको भाई, पहले ये तय कर लें कि लाश किस थाने की मिट्टी पर गिरेगी, तभी तो फाइल छुएंगे!
मतलब, अपराधी बंदूक लोड कर रहा था और हमारे साहब लोग इंच-टेप लेकर बॉर्डर नाप रहे थे। इसे कहते हैं—”काम का टालमटोल, सिस्टम का डब्बा गोल!
‘विधायक जी’ का ‘टच’ और साहब की हिचकिचाहट
कहते हैं आरोपी अजय प्रताप के सिर पर स्थानीय विधायक का हाथ था। अब भाई, जहां ‘माननीय’ का वरदहस्त हो, वहां खाकी वर्दी में अचानक ‘सिकुड़न’ आने लगती है। अधिकारियों को शायद डर था कि अगर आरोपी को पकड़ा, तो कहीं खुद की पोस्टिंग किसी ऐसे जिले में न हो जाए जहां गूगल मैप भी रास्ता न बताए।
अपराधी के पास ‘पावर’ थी, और साहब के पास सिर्फ ‘पाउडर’ (जो वो फाइलों पर डाल रहे थे)।
शिकायत का ‘कचरा सेठ’ स्टाइल इलाज
एचपीसीएल के डीजीएम सुधीर गुप्ता ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा—”साहब, जान का खतरा है!” डीएम ने आदेश भी दे दिया। लेकिन आदेश का क्या हुआ! वो आदेश शायद उस फाइल में दब गया जिसे ‘कल देखेंगे’ वाले बॉक्स में रखा जाता है।
एसएसपी ने थाना प्रभारी को जांच सौंपी, लेकिन प्रभारी जी शायद कुंडली मिलाने में व्यस्त थे कि जांच शुरू करने का शुभ मुहूर्त कब निकलेगा। नतीजा! मुहूर्त निकला तो सीधे ‘पोस्टमार्टम’ का!
वाह रे सिस्टम!
बदायूं की ये घटना सिखाती है कि अगर आपके पास राजनीतिक पहुंच है, तो पुलिस आपके लिए ‘स्टैच्यू-स्टैच्यू’ खेल सकती है। दो अफसरों की ईगो और डर के बीच दो जिंदगियां खत्म हो गईं, लेकिन फाइलें आज भी मुस्कुरा रही होंगी कि चलो, एक और केस ‘लंबित’ की लिस्ट में शामिल हुआ।