रिपोर्ट विजय कुमार सोनभद्र जिले के घोरावल क्षेत्र के कोहरथा गांव में गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म जयंती मनाई गई वक्ताओं ने बताया कि उनका जन्म सन 1532 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था। उन्होंने महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ की रचना की। उनकी मृत्यु सन 1623 ईस्वी में काशी के अस्सी घाट पर हुई।बचपन का नाम: रामबोला, क्योंकि जन्म लेते ही उनके मुँह से राम निकला था।पत्नी रत्नावली की एक बात से उन्हें गहरा आघात लगा। उनके मन में संसार के प्रति वैराग्य उत्पन्न हो गया और वे भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए। इनके गुरु नरहरी दास जी थे उन्होंने ही गोस्वामी तुलसीदास जी को शिक्षा दीक्षा प्रदान की। तुलसीदास जी ने श्रीरामचरित मानस अवधि भाषा में लिखा था।संवत सोलह सौ असी, असी गंग के तीर। श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर।। तुलसीदास जी काशी के असी घाट पर मृत्यु हो गया था। तुलसीदास जी एक जगह जा रहे थे देखे कि एक पत्नी मर गई थी उसका पति रो रहा था तो तुलसीदास जी ने पूछा कि क्या हुआ तो बताए वो सब की मृत्यु हो गया है तो तुलसीदास जी ने मरी हुई महिला के कान में जाकर बोला राम नाम सत्य है ये सुनकर महिला उठ गई तभी से कोई मरता है तो बोला जाता है राम नाम सत्य है। आए हुए सभी ने तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया और उनके व्यक्तित्व के बारे में मंथन किया। इस अवसर पर दिवाकर पाठक,आशुतोष मिश्रा, प्रवीण त्रिपाठी , श्रीपति त्रिपाठी, आशीष त्रिपाठी, गुड्डू चौबे, अंजन चौबे, दिव्यांश चौबे उपस्थित हुए।