विशेष संवाददाता – जगदीश शुक्ला।वाराणसी/उत्तर प्रदेश। जनपद वाराणसी के थाना चोलापुर अंतर्गत मुर्दहां चौकी क्षेत्र के ग्राम औरा में भूमि विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। पीड़ित पक्ष दिनेश चतुर्वेदी एवं विकास का आरोप है। कि न्यायालय के स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) के बावजूद उनकी भूमि पर कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय पुलिस एवं राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, रकबा संख्या-208 से संबंधित विवाद सिविल कोर्ट सदर में विचाराधीन है। न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। और जांच रिपोर्ट आने तक उक्त भूमि पर किसी प्रकार का कार्य न किए जाने का आदेश पारित किया गया है। इसके बावजूद, उनका आरोप है। कि प्रभावशाली लोगों द्वारा आदेश की अनदेखी करते हुए भूमि पर कब्जे का प्रयास जारी है। दिनेश चतुर्वेदी का कहना है। कि पूर्व में राजस्व विभाग की रिपोर्ट भी निष्पक्ष नहीं रही, जिसके चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उनका आरोप है। कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो प्रशासन ने प्रभावी हस्तक्षेप किया और न ही उन्हें अपेक्षित सुरक्षा प्रदान की गई। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है। कि गोरखनाथ पांडेय, प्रसिद्ध नाथ पांडेय, दीनानाथ पांडेय, श्रीनाथ पांडेय, प्रमोद पांडेय, विजय पांडेय, शैलेश पांडेय एवं शुभम पांडेय सहित अन्य लोगों द्वारा कथित रूप से उनकी भूमि पर अतिक्रमण का प्रयास किया गया। विरोध करने पर गाली-गलौज, हाथापाई तथा जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है। कि यदि न्यायालय का स्थगन आदेश प्रभावी है। तो उसकी अवहेलना करने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या स्थानीय प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। यदि पीड़ित पक्ष के आरोप सही हैं। तो यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों की गरिमा और कानून के शासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।पीड़ितों का कहना है। कि उन्होंने मुर्दहां चौकी पर लिखित शिकायत देकर सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक कार्रवाई होती नहीं दिखाई दे रही है। लगातार मिल रही कथित धमकियों के कारण परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को विवश है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त एवं संबंधित राजस्व अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। या नहीं। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद कभी भी किसी बड़ी अप्रिय घटना का रूप ले सकता है। समाचार में वर्णित सभी आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। मामले की सुनवाई न्यायालय में लंबित है। प्रशासन एवं दूसरे पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।