वरिष्ठ पत्रकार दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट
चौबेपुर।क्षेत्र के उमरहां में स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना, पर्यटन और शिक्षा का एक सशक्त संगम बनकर उभर रहा है। नववर्ष 1 जनवरी 2026 के अवसर पर स्वर्वेद महामंदिर धाम श्रद्धा, शांति और अनुशासन का जीवंत प्रतीक बना रहा।
नववर्ष के पावन दिन प्रातः काल से रात्रि 9 बजे तक श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन जारी रहा। पूरे दिन चले इस अविराम प्रवाह में करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालुओं की सहभागिता दर्ज की गई, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद स्वर्वेद महामंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। विशाल परिसर, भव्य वास्तुकला, अद्वितीय शिल्पकला और शांत वातावरण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। मंदिर परिसर में पत्थरों से निर्मित ऋषि-ऋषिकाओं, हाथियों सहित अन्य सांस्कृतिक आकृतियां भारतीय दर्शन और सभ्यता की सजीव झलक प्रस्तुत करती हैं।स्वर्वेद महामंदिर को विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्रों में शामिल किया जाता है। यहां ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि परिसर में प्रवेश करते ही मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।पर्यटन विभाग की सक्रियता से बढ़ी पहचान पर्यटन विभाग द्वारा स्वर्वेद महामंदिर को प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित और प्रचारित किया जा रहा है। साइन बोर्ड, पर्यटन मार्गदर्शन, सुविधाओं का विस्तार और धार्मिक सर्किट से जोड़ने की योजनाओं के कारण यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अब यह स्थल काशी के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सूची में तेजी से शामिल होता जा रहा है।ज्ञान अर्जन के लिए पहुंच रहे स्कूल–कॉलेज पर्यटन के साथ-साथ स्वर्वेद महामंदिर अब एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है। पूर्वांचल के गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, चंदौली, भदोही, मऊ, आजमगढ़ सहित विभिन्न जिलों के स्कूल एवं कॉलेजों के विद्यार्थी यहां भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और नैतिक मूल्यों को समझने के उद्देश्य से पहुंच रहे हैं।शिक्षकों का मानना है कि स्वर्वेद महामंदिर विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन मूल्यों, अनुशासन और एकाग्रता का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास होता है।स्थानीय रोजगार को भी मिल रहा बढ़ावा स्वर्वेद महामंदिर के कारण क्षेत्र में धार्मिक, शैक्षणिक और पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे होटल, भोजनालय, परिवहन, गाइड सेवा और स्थानीय दुकानदारों को लाभ मिल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।स्वर्वेद महामंदिर आज काशी की आध्यात्मिक परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए आस्था, पर्यटन और शिक्षा के समन्वय का सशक्त उदाहरण बनता जा रहा है।