सलीम मंसूरी की रिपोर्ट
जमानियां। बंदरों का आतंक चरम पर है। जिससे निवासियों में खौफ का माहौल है। बंदर घरों में घुसकर सामान व खाने-पीने की चीजें चुरा रहे हैं। और लोगों को घायल कर रहे हैं। विशेषकर बच्चों व बुजुर्गों पर हमलों से दहशत है। प्रशासन से ठोस कार्रवाई करने के लिए गोहर लगाई की (बंदरों को पकड़ना और उसे स्थानांतरित करने की मांग किया। बंदरों के आतंक को दिखाता है। की सड़क से लेकर गलियों में उतर कर उत्पाद मचा रहे है।
बंदरों के आतंक घर में रखे खाने पीने की सामग्री को निशाना बना रहे है। धीरे धीरे बंदरों का उत्पाद इतना बढ़ गया है। की बंदर घरों में घुसकर खाने की वस्तुएं, कपड़े ले जाते हैं। और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। कस्बा निवासियों को सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। छतों पर बने नल, डिश एंटीना, और बिजली के तार तोड़ दिए गए हैं। लगातार हमले में लोगों को काटकर घायल करने की घटनाएं आम हो गई हैं। जिससे लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। जिसकी दैनिक जीवन पर असर पड़ने लगी है।बच्चे बाहर खेलने से कतरा रहे हैं। और स्कूल-कोचिंग जाना प्रभावित हो रहा है। बेलाल अहमद, कमाल अहमद, जमाल अहमद, उत्कर्ष बर्नवाल, सुभाष चौधरी, ब्रह्मदेव आर्य, बब्बन कनौजिया सहित आदि लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए। बंदरों को पकड़कर सुरक्षित वनों में छोड़ने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि बंदरों के काटे जाने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर घायलों की संख्या दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है।