राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय से कुल 44712 वादों का निस्तारण कर 6,64,37,588.47 धनराशि की बसूली की गयी

दिव्य प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट                              वाराणसी। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ शनिवार को दीवानी सभागार में जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला द्वारा दीप प्रज्जवलित करके किया। अपने अध्यक्षीय उदबोधन में जनपद न्यायाधीश कहा गया कि लोक अदालत भारत के संबंध में कोई नया विषय नहीं है। लोग आदिकाल से ही पंचायत व्यवस्था या इससे पूर्व की व्यवस्थाओं में, आपसी बातचीत व परस्पर सामंजस्य से समझौते तक पहुंचते का प्रयास करते रहें हैं। सन् 1987 के अधिनियम के द्वारा हमारी उसी व्यवस्था को विधिक पहचान दे दी गयी।   उन्होंने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा माध्यम बनकर उभरा है, जिससे हम अपना समय गवायें बिना गंभीर से गंभीर मामलों में निस्तारण तक पहुंच सकते हैं। पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जनपद न्यायाधीश द्वारा कहा गया कि परिवार समाज की ईकाई है, ऐसी स्थिति में न्यायालय की भूमिका पारिवारिक समरसता बनाने के परिप्रेक्ष्य में बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न्यायालय का कार्य वास्तव में परिवारों को जोड़ना है न कि तोड़ना

है।  इस कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय- अनिरूद्ध कुमार तिवारी भी उपस्थित रहे। जिन्होंने पारिवारिक न्यायालय के माध्यम से 17 वैवाहिक जोड़ों को पुनः साथ रहने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम में बनारस व सेन्ट्रल बार महामंत्री एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी- आलोक कुमार व प्रवीण कुमार सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के जी०एम०- बी०एन० सिंह तथा सभी न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहें।   इस राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय वाराणसी से कुल 44712 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें कुल मिलाकर 6,64,37,588.47 मात्र धनराशि की बसूली की गयी तथा प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा कुल 436502 वादों का निस्तारण किया गया। रू0-10,29,13,390.00 मात्र की धनराशि की वसूली हेतु समझौता हुआ। न्यायालय तथा प्रशासन के सभी विभागों से कुल मिलाकर 4,81,214 वादों का निस्तारण हुआ जिसमें कुल रू0-16,93,50,97847 मात्र का वसूली किया गया।

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