सलीम मंसूरी की रिपोर्ट जमानियां। हनुमान मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फूली गांव से कन्याओं के द्वारा गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। जो पक्का बलुआ घाट गंगा नदी पहुंचकर कलश में गंगा जल भरकर फूली गांव के लिए रवाना हुई। जिसके बाद वेदों से प्राण प्रतिष्ठान किया गया है। विभिन्न पुराणों, जैसे मस्त्य पुराण, वामन पुराण, नारद पुराण आदि में भी इसका विस्तार से वर्णन किया गया। बतायावजाता है। कि विकास खंड अंतर्गत ग्राम फूली गांव में नव निर्मित भव्य हनुमान मंदिर में हनुमान की प्राण प्रतिष्ठा किया गया। इसकी तैयारियां जोर शोर से चल रहा था। जिसका मंगलवार को सैकड़ों कन्याए कलश यात्रा के साथ कस्बा बाजार के पक्का बलुआ घाट गंगा नदी पहुंची। जहां कलश में गंगा जलभर वापस फूली गांव के लिए रवाना हुई। कलश यात्रा जुलूस में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। बता दें कि प्राण प्रतिष्ठा का शाब्दिक अर्थ तो प्रतिमा में प्राण की स्थापना करना है। लेकिन इस अनुष्ठान का धार्मिक महत्व इसके अर्थ से ज्यादा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है। कि आखिर प्राण प्रतिष्ठा क्या है और उससे जुड़े विधि-विधान क्या हैं। तो पुजारी ब्राम्हण उद्धव कुमार पांडेय ने बताया कि हिंदू धर्म परंपरा में प्राण प्रतिष्ठा एक पवित्र अनुष्ठान है। जो किसी मूर्ति या प्रतिमा में उस देवता या देवी का आह्वान कर उसे पवित्र या दिव्य बनाने के लिए किया जाता है। प्राण शब्द का अर्थ है। जीवन जबकि प्रतिष्ठा का अर्थ है स्थापना। ऐसे में प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है प्राण शक्ति की स्थापना या देवता को जीवंत स्थापित करना।’ भव्य हनुमान मंदिर में प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। पूर्व ग्राम ग्राम प्रधान विजय यादव ने बताया कि शास्त्रों और धर्माचार्यों के अनुसार जब किसी प्रतिमा में एक बार प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है। तो वह प्रतिमा एक देवता में बदल जाती है। वह देवता हमारी या किसी भी उपासक की प्रार्थना स्वीकार कर सकते है। और अपना वरदान दे सकते हैं। आमतौर पर जब भी प्राण स्थापना होती है। तो उस प्रक्रिया के साथ मंत्रों का जाप,अनुष्ठान और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।