वाराणसी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गुप्ता — केन्द्र व राज्य की सरकारों को रक्षा अध्ययन (मिलिट्री साइंस) के छात्रों को सेना,पुलिस व अर्धसैनिक बलों की होने वाली भर्तियों में वरीयता के आधार पर नियुक्तियां करनी चाहिए। उक्त बातें उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय के मिलिट्री साइंस विभाग के प्रवक्ता डा.अग्निप्रकाश शर्मा ने अनौपचारिक रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रकाशित खबर के अनुसार भारतीय सेना की अधिकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक सरल पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जेईई,नीट,क्लैट-पीजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के अंकों के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों को सीधे सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) इंटरव्यू के लिए आमंत्रित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। यदि विभिन्न व्यावसायिक एवं तकनीकी विषयों के विद्यार्थियों को इस प्रकार का अवसर प्रदान किया जा सकता है तो रक्षा अध्ययन (सैन्य विज्ञान) जैसे सेना एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े विषय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को भी अधिकारी भर्ती के लिए एसएसबी इंटरव्यू,सेना, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों में पात्रता के आधार पर विशेष वरीयता दिये जाने पर गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए। सैन्य विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य शक्ति, युद्ध कला, सैन्य इतिहास, सामरिक चिंतन, भू-राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, रक्षा प्रबंधन, आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा तथा आधुनिक युद्ध प्रणाली का समग्र अध्ययन करवाता है। इस विषय का विद्यार्थी सेना के संगठन, कार्य प्रणाली, युद्ध संचालन, राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों तथा समकालीन सामाजिक परिवेश की गहन समझ विकसित करता है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर विद्यार्थी कार्ल,वान क्लाजविट्ज,जेएफसी,फुलर, बीएच,लिडेल हार्ट, अल्फ्रेड थायर महन,डुहे, नेपोलियन, माओत्से तुंग तथा कौटिल्य जैसे महान सैन्य विचारकों के सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं। इनके विचार केवल युद्ध संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, रणनीतिक निर्णय, मनोबल निर्माण, संकट प्रबंधन तथा राष्ट्रीय शक्ति की समुचित प्रयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों का भी मार्गदर्शन करते हैं। इस विषय की एक महत्वपूर्ण विशेषता सैन्य मनोविज्ञान का अध्ययन है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को सैनिकों के व्यवहार, नेतृत्व, प्रेरणा, मनोबल, तनाव प्रबंधन, युद्ध कालीन मानसिक दृढ़ता,समूह गतिशीलता तथा कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाता है।