वाराणसी। राजनीति विज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और द क्लाइमेट एजेंडा, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘क्लाइमेट चेंज: इम्प्लिकेशन फॉर सोसाइटी एंड पॉलिटी’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ ने कहा कि प्रकृति समर्थन भी करती है और संतुलित भी करती है। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली भविष्य के बारे में सोचना होगा। प्रकृति के उपयोग की कुछ तो सीमाएं होनी चाहिए। सौ साल बाद प्रकृति संतुलन का कार्य करती है। प्रकृति का अंत भी है, इसलिए नियंत्रण में रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर नीति निर्माताओं को सोचने की जरूरत है। अगर हम सभी आज नियंत्रण नहीं करेंगे तो आने वाले समय में जल के लिए युद्ध होगा। इस मौके पर क्लाइमेट एजेंडा की टीम द्वारा जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से संबंधित लघु फिल्म के द्वारा विद्यार्थियों को गंभीर समस्या से अवगत कराया गया। संस्था के निर्देशक रवि शेखर ने पी.पी.टी. प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि वायु प्रदूषण के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से निकलने वाले जहरीले गैस ज्यादा हानिकारक है। बिजली उत्पादन के पारंपरिक तरीकों को अपनाकर भी हम वायु को प्रदूषित कर रहे हैं। अब हमें पारंपरिक तकनीकों की जगह नई तकनीकों को अपनाना होगा।क्लाइमेट एजेंडा की डायरेक्टर एकता शेखर ने कहा कि भारत में 18 प्रतिशत मौत प्रदूषित हवा के कारण हो रही है। भारत में आउटडोर और इनडोर दो तरीके से वायु प्रदूषित हो रही है, जिसमें परिवहन, उद्योग, घरेलू सफाई आदि की भूमिका है। संचालन डॉ. जयदेव पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रवि प्रकाश सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. सूर्यभान प्रसाद, डॉ. रेशम लाल, डॉ. विजय कुमार, डॉ. पीयूष मणि त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ज्योति त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।
काशी विद्यापीठ : राजनीति विज्ञान विभाग में क्लाइमेट चेंज पर कार्यशाला आयोजिकाशी विद्यापीठ : राजनीति विज्ञान विभग में क्लाइमेट चेंज पर कार्यशाला आयोजित काशी विद्यापीठ : राजनीति विज्ञान विभाग में क्लाइमेट चेंज पर कार्यशाला आयोजित काशी विद्यापीठ : राजनीति विज्ञान विभाग में क्लाइमेट चेंज पर कार्यशाला आयोजित
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