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भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ द्वारा मुख्यालय कन्दवा कार्यालय पर संविधान दिवस पर परिचर्चा 

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भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ द्वारा मुख्यालय कन्दवा कार्यालय पर संविधान दिवस पर परिचर्चा

वाराणसी दिनांक 30 नवम्बर 2025; आज भारतीय गणतंत्र रक्षक संघ द्वारा संघ के मुख्यालय कंदवा, वाराणसी पर कार्यकर्ताओं द्वारा संविधान दिवस पर परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया | परिचर्चा संगोष्ठी का प्रारंभ भारत के संविधान की उद्देश्यिका का पाठन करके हुआ | वक्ताओं ने बताया कि संविधान सभा प्रथम बार 9 दिसंबर 1946 को समवेत हुई और 25 नवम्बर 1949 को पुरे 2 वर्ष ग्यारह महीने और सत्रह दिन हुए थे | इस दौरान संविधान सभा के कुल सत्रह सत्र हुए थे | मसौदा समिति का निर्वाचन संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को किया था |उसकी पहली बैठक 30 अगस्त को हुई | 30 अगस्त से उसकी बैठक 141 दिनों तक हुई और इस दौरान वह संविधान का मसौदा तैयार करने में लगी रही | अंतिम रूप में संविधान के मसौदे में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी | वर्तमान में संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं | अनुच्छेद 243 व के अंतर्गत 12 वीं अनुसूची संविधान 74 वां संशोधन अधिनियम 1992 की धरा 4 द्वारा (1-06-1993 से) अंतःस्थापित है |

वर्त्तमान परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस तरह से बिहार में चुनाव अचार संहिता की धज्जियाँ उडी हैं उससे यह स्पष्ट है कि देश का लोकतांत्रिक गणतंत्र खतरे में है | चुनाव आयोग जिसके कंधे पर गणतंत्र की रक्षा का भार है वह निष्पक्ष नहीं है | बिहार का एस.आई.आर आलोचना से परे नहीं है | इंडिया गठबंधन ने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली और निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लगा रखा है | भारत का संविधान स्वतंत्रता, समता और बंधुता की बात करता है, वहीं राज्य के व्यवहार में उल्टा नजर आता है | उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद बुलडोजर तंत्र कायम है | दलित, आदिवासियों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ा है | किसानों की स्थिति बद से बदहाल हो चुकी है| बेरोजगारी बढ़ती जा रही है | देश में सांप्रदायिक कट्टरता बढ़ रही है | निश्चित रूप से लोकतंत्र पर कुठाराघात हो रहा है | जनता सहमी सी हुई है, वह अपनी विचारों की अभिव्यक्ति नहीं कर पा रही है | ऐसी परिस्थिति में संघ की जिम्मेदारी बढ़ जाती है | बंधुता को विकसित करते हुए समाज में शांति और सामंजस्यता को कायम रखते हुए भयमुक्त वातावरण का निर्माण करना आवश्यक है |

संविधान दिवस की परिचर्चा में संजीव गौड़, अरुण कुमार वर्मा, विकास कुमार वर्मा, राधेश्याम, बृजेश कुमार, बाबू लाल, जितेन्द्र प्रसाद. विप्लव, राजकुमार, सुभाष साह, आदि लोगों ने अपने विचार रखे |

संविधान दिवस परिचर्चा की अध्यक्षता डॉ. उमेश चन्द्र, संचालन अरुण कुमार वर्मा और धन्यवाद ज्ञापन विकास जी ने किया |

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