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गोंड समुदाय के द्वारा निर्मित सिल्कसाड़ी एवं वुडन हस्तशिल्प कार्वीग उत्पाद ने आदि महोत्सव में बनाया विशेष पहचान

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वाराणसी के गोंड समुदाय के द्वारा निर्मित सिल्कसाड़ी एवं वुडन हस्तशिल्प कार्वीग उत्पाद ने आदि महोत्सव में बनाया विशेष पहचान जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, के अधीन कार्यरत भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राईफेड) देहरादून द्वारा दिनाँक 15-23 दिसंबर 2025 *#आदि बाज़ार* राज्य स्तरीय प्रदर्शनी एवं सह बिक्री कार्यक्रम बनारस हिंदू विश्विद्यालय, बनारस, के मधुबन लॉन में 9 दिवसीय आयोजन में जनपद वाराणसी के आदिवासी हितों में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्थान जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान वाराणसी से जुड़ कर कार्य करने वाले गोंड समुदाय के शिल्पकारों एवं बुनकरों द्वारा उत्पादित बनारसी सिल्क साड़ी एवं वुडन कार्विंग वस्तुओं को BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, पद्मश्री डॉ रजनीकांत जी ने सराहाना किया और जनपदवासी, छात्र – छात्राओं बढ़ चढ़कर खरीदारी के साथ हीं जनजातियों द्वारा बनाए गए वस्तुओं की बारीकी को भी देखा l जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी ट्राइफेड- जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़ कर विगत 10 वर्षों से संबद्ध होकर जनपद के गोंड समुदाय के आर्थिक विकास तथा स्वरोजगार के हेतु प्रयासरत रहता है इसी क्रम में देश भर में ट्राइफेड द्वारा आयोजित आदि महोत्सव में प्रतिभग कर सीधे जनजाति शिल्पकारों एवं बुनकरो को लाभ पहुंचा रहा है l संस्थान के सचिव डॉ. बृजभान मरावी ने बताया कि संस्थान प्रदेश के जनजाति समाज के शैक्षणिक सामाजिकशैक्षणिक सामाजिक एवं आर्थिक विकास के क्रम में विकसित भारत 2047 में जनजाति का प्रतिभागिता हेतु कार्यरत है I संस्थान ने अब तक विविध शिल्प क्षेत्रों में 500 से अधिक जनजाति समुदाय को प्रशिक्षित किया है I

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