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आईपीएस सरवणन टी: अपराधियों की दुनिया में दहशत का पर्याय

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कार्यालय प्रतिनिधि की रिपोर्ट 

विश्व की सांस्कृतिक राजधानी काशी में आजकल एक नाम अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा करता है—डीसीपी क्राइम/एडीसीपी (काशी)आईपीएस सरवणन टी। चाहे साइबर अपराधी हो या स्थानीय छुटभैया टाइप बदमाश, सबको इनकी टीम ने देश के कोने कोने से पकड़कर सलाखों के पीछे भेजा है तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से निकलकर उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में अपनी छाप छोड़ने वाले इस युवा आईपीएस अधिकारी को अपराध की दुनिया में ‘दहशत का दूसरा नाम’ कहा जाता है। महज 32 साल की उम्र में, 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी सरवनन टी ने वाराणसी कमिश्नरेट में अपनी तैनाती से शहर की कानून-व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उनकी कहानी साहस, समर्पण और स्मार्ट पुलिसिंग की मिसाल हैसरवणन टी का जन्म 21 अक्टूबर 1991 को तिरुचिरापल्ली में हुआ। उनके पिता थंगमणि एम. ने उन्हें मेहनत और ईमानदारी की सीख दी। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक करने के बाद, सरवणन ने सिविल सर्विसेज का रास्ता चुना। 2019 में आईपीएस बनने के बाद, उन्होंने राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में अपनी ट्रेनिंग के दौरान ही अपनी क्षमता दिखाई। यहां उन्होंने एल.बी. सेवा मेमोरियल ट्रॉफी जीती, जो सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु को दी जाती है। साथ ही, हिंदी के लिए बनर्जी कप भी उनके नाम रहा। दक्षिण भारत से आने वाले इस अधिकारी ने हिंदी और स्थानीय भाषाओं को इतनी जल्दी सीखा कि वाराणसी पहुंचते ही वे लोकल लोगों से भोजपुरी में बात करने लगे। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “साहब तमिलनाडु से हैं, लेकिन बनारसी जैसे लगते हैं। अपराधी डरते हैं, क्योंकि वे हर गली-मोहल्ले की नब्ज जानते हैं।फरवरी 2023 में वाराणसी कमिश्नरेट में तैनात होने के बाद, सरवनन टी ने अपराध पर लगाम कसने की मुहिम छेड़ी। उनकी रणनीतियां इतनी प्रभावी रहीं कि अवैध स्पा सेंटर्स और वेश्यावृत्ति के रैकेट्स पर लगातार छापेमारी हुई।सैकड़ो साइबर अपराधी देश के कोने कोने से पकड़े गए और जेल गए, हाल ही में, उनकी टीम ने कई बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया, जिसमें करोड़ों की संपत्ति जब्त हुई।डीजीपी की कमेंडेशन डिस्क सिल्वर (26 जनवरी 2023) से सम्मानित सरवणन ने वाराणसी को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाई। वाराणसी में तैनाती के बाद से अब तक सरवणन टी के नेतृत्व/निर्देशन में हुई पुलिस मुठभेड़ों में 29 अपराधियों को पुलिस पर गोली चलाना भारी पड़ा और पुलिस ने जवाबी फायरिंग में उनकी टांग में गोली मारी और गिरफ्तार कर जेल भेजा। सरवणन की पुलिसिंग सिर्फ सख्त नहीं, संवेदनशील भी है। उन्होंने साइबर क्राइम पर फोकस बढ़ाया और सैकड़ो साइबर अपराधियों को जेल भेजवाया और समाज मे छात्रों से लेकर आम नागरिकों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिये लगातार जागरूकता अभियान भी चलाते रहते है।हाल ही में कर्णघंटा वाली घटना में, उनकी टीम ने 3 करोड़ के चोरी के सोने के आभूषण बरामद किए और 5 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। यह सब उनकी स्मार्ट स्ट्रैटजी का नतीजा है, जहां तकनीक और जमीन पर काम का मेल है।वाराणसी, जो पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है, सरवणन जैसे अधिकारियों से और मजबूत हो रही है।  दक्षिण से उत्तर की सांस्कृतिक दूरी को पाटते हुए, सरवणन ने साबित किया कि सच्चा पुलिस अधिकारी सीमाओं से परे होता है। अपराधियों के लिए वे खौफ हैं, तो आम आदमी के लिए उम्मीद। उनकी जज्बे से प्रेरित होकर, वाराणसी की पुलिस अब एक मिसाल बन चुकी है। सरवणन टी की कहानी बताती है कि साहस से कुछ भी संभव है।

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