UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: ‘जातिविहीन समाज’ की दिशा में बड़े सवाल

*UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: ‘जातिविहीन समाज’ की दिशा में बड़े सवाल

*भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की ओर से एके बिंदुसार ने सुप्रीम कोर्ट एवं केंद्रीय कैबिनेट मंत्रालय से पुनः समीक्षा की मांग उठाई थी*

नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इन विवादित नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इस फैसले का भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने स्वागत किया है।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “क्या हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं?”

मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने नए नियमों की सार्थकता और उनके सामाजिक प्रभाव पर कड़े सवाल खड़े किए। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां निम्नलिखित हैं:जातिविहीन समाज का लक्ष्य: CJI ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने एक जातिविहीन समाज बनाने की दिशा में जो प्रगति की है, क्या ये नए नियम हमें वापस उसी पुरानी दिशा में ले जा रहे हैं?हॉस्टल का पृथक्करण: कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा SC/ST छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता और विविधता झलकनी चाहिए, न कि विभाजन। आरक्षण के भीतर आर्थिक बदलाव: कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरक्षित समुदायों के भीतर भी अब एक बड़ा वर्ग समृद्ध हो चुका है, इसलिए सुविधाओं का आवंटन केवल जातिगत आधार पर अलग-अलग करके नहीं किया जाना चाहिए।भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने जताया आभार–सुप्रीम कोर्ट के इस स्थगन आदेश पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पुनः समीक्षा की मांग: एके बिंदुसार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय कैबिनेट मंत्रालय से यूजीसी कानून की पुनः समीक्षा करने की पुरजोर मांग उठाई थी। धन्यवाद ज्ञापन: कोर्ट के इस फैसले को सामाजिक न्याय और एकता की जीत बताते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना आभार प्रकट किया है।देशभर में विरोध का माहौल यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर केवल कानूनी गलियारों में ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी विरोध देखा जा रहा है।  छात्रों का प्रदर्शन: देशभर के विश्वविद्यालयों में सवर्ण जाति के छात्र इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। नागरिक असंतोष: आम नागरिकों का मानना है कि ऐसे नियम सामाजिक समरसता को बिगाड़ सकते हैं और शैक्षणिक वातावरण में विभाजन पैदा कर सकते हैंसुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब केंद्र सरकार और यूजीसी को इन नियमों के प्रारूप पर दोबारा विचार करना होगा। फिलहाल, अगले आदेश तक कोई भी नया नियम लागू नहीं होगा, जिससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है जो इसे अपनी शैक्षणिक स्वतंत्रता और सामाजिक एकता के खिलाफ मान रहे थे।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x